चंबा की खस्ताहाल सड़कें और ट्रक यूनियनों की मनमानी चंबा में स्थापित होने वाले सफेद सीमेंट प्लांट के लिए रोड़ा बन गई हैं। यही कारण है कि प्लांट के लिए आवेदन मांगने के बावजूद किसी भी औद्योगिक इकाई ने आवेदन ही नहीं किया।
अब सरकार नए सिरे से आवेदन मांगने की तैयारी कर रही है। लेकिन इससे पहले बड़े उद्योगों के इच्छा न जताने के बाद हुई समीक्षा में सामने आए कारणों को भी दूर करने पर विचार किया जा रहा है।
दरअसल, सरकार ने एलान किया था कि चंबा में सफेद सीमेंट प्लांट स्थापित होगा। इससे न सिर्फ आसपास के क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगाें को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा। बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि भी बढ़ेंगी। इसी को देखते हुए सरकार ने इकाई स्थापित कर चलाने के लिए आवेदन मांगे।
शुक्रवार को अंतिम दिन तक एक भी औद्योगिक घराने ने आवेदन नहीं किया। इसके बाद अनौपचारिक रूप से उद्योग विभाग के अधिकारियों ने वर्तमान में सीमेंट प्लांट संचालित करने वाले व्यापारियों से आवेदन न आने के कारण जानने के लिए संपर्क साधा।
नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि चंबा क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति की वजह से औद्योगिक घराने आगे नहीं बढ़ रहे। वहीं, ट्रक यूनियनों की वजह से हर सौ किलोमीटर पर प्रति बोरी करीब पचास रुपये रेट बढ़ जाते हैं। ऐसे में महंगी सीमेंट बनाना घाटे का ही सौदा रहेगा।
उद्योगपतियों से मिले फीडबैक के बाद अब विभागीय अधिकारी इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में हैं। प्रधान सचिव उद्योग आरडी धीमान ने कहा कि उद्योगपतियों से कुछ फीडबैक मिला है। कोशिश की जाएगी कि उनकी समस्याओं को दूर किया जाए ताकि वह निवेश करने में हिचक न महसूस करें।