फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

West Asia Crisis: हिमाचल के हजारों मेधावियों को झटका, लैपटॉप और टैबलेट के बढ़े दाम; रिडीम नहीं हो रहे ई-वाउचर

Sun, 12 Apr 2026 07:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिमेष कौशल, शिमला

सार

एक ओर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम बढ़ गए हैं, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियों और देरी ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नतीजतन, सरकार की ओर से दिए गए 16-16 हजार के ई-वाउचर अब तक बड़ी संख्या में रिडीम नहीं हो पा रहे।
विज्ञापन
demo - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के हजारों मेधावी विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई श्रीनिवास रामानुजन स्टूडेंट्स डिजिटल योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम बढ़ गए हैं, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियों और देरी ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नतीजतन, सरकार की ओर से दिए गए 16-16 हजार के ई-वाउचर अब तक बड़ी संख्या में रिडीम नहीं हो पा रहे।

विज्ञापन


कांग्रेस सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर दिसंबर 2025 में मंडी से इस योजना की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों को रियायती दर पर लैपटॉप या टैबलेट उपलब्ध कराना था, लेकिन जमीन स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।

मेधावी विद्यार्थियों का आरोप है कि योजना के पोर्टल पर दिए गए लिंक पर लॉगइन करते समय ओटीपी ही प्राप्त नहीं हो रहा। इससे वे डिवाइस ऑर्डर करने में असमर्थ हैं। कई छात्र 5-6 बार कोशिश करने के बावजूद सफल नहीं हो पाए हैं। वर्ष 2022-23 में पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों को मार्च 2026 में जाकर ई-वाउचर दिए गए हैं, जबकि उनकी वैधता 11 दिसंबर 2025 से 10 जून 2026 तक ही है।
विज्ञापन


पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लैपटॉप और टैबलेट के दाम बढ़ गए हैं। पोर्टल पर चयनित कंपनियों ने भी महंगे उपकरणों और बढ़ी हुई रैम-स्टोरेज लागत का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में 16,000 रुपये में उपयुक्त डिवाइस खरीदना छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

वाउचर रिडीम नहीं हो पाना विभाग की लापरवाही
संजौली कॉलेज की पूर्व छात्रा सरगम शर्मा ने कहा कि वाउचर देर से दिए गए। अगर समय पर मिलते तो मनोबल बढ़ता। वाउचर रिडीम न हो पाना शिक्षा विभाग की लापरवाही है और यह छात्रों के अधिकारों का हनन है। कोटशेरा कॉलेज के पूर्व छात्र अनुज शर्मा ने कहा कि 16 हजार रुपये पर्याप्त नहीं हैं। इतने वर्षों बाद वाउचर देना सरकार की कमी दिखाता है। रिडीम प्रक्रिया की भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

संजौली कॉलेज के ही पूर्व छात्र रमन ने कहा कि कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। जून में वाउचर एक्सपायर होने का डर सता रहा है। सीमा कॉलेज की पूर्व छात्रा सलोनी सिंह ने कहा कि पोर्टल पर बार-बार लॉग इन करने के बावजूद सफलता नहीं मिल रही है।

विभागीय अधिकारी निकाल रहे समस्या का समाधान
वाउचर रिडीम न होने की समस्या से कुछ विद्यार्थियों ने अवगत कराया है। अधिकारियों को संबंधित बैंक से इस मामले को उठाने के लिए कहा गया है। जल्द ही समस्या को हल किया जाएगा। उपकरणों के दाम के मामले में चयनित कंपनियों से बात चल रही है। एक कंपनी अभी भी पुरानी शर्तों पर सेवा दे रही है। शिक्षा सचिव को यह मामला हल करने के निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन

- रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री हिमाचल प्रदेश सरकार

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें