शिमला। आईजीएमसी की इमरजेंसी के बाहर लगाया गया वाटर एटीएम पंद्रह दिन से बंद है। वाटर एटीएम के बंद होने के कारण मरीज और तीमारदारों को परेशानी हो रही है। ये महंगी दरों पर पानी खरीदने को मजबूर है। 1, 2 और 5 रुपये का सिक्का डालने पर लोगों को स्वच्छ पानी देने के दावा किया गया था, लेकिन ये वाटर एटीएम 15 दिन से हांफ गया है। मरीजों को बीस रुपये देकर दुकानों से पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। वाटर एटीएम के बंद होने के बाद इसे फिर से शुरू नहीं किया गया है। अस्पताल में स्थापित इस वाटर एटीएम में डाले जाने वाले सिक्के निकालने के बाद आरकेएस में जमा करवाए जाने थे। लोगों ने बताया कि वाटर एटीएम शोपीस बनकर रह गया है। लोग एटीएम के पास पानी भरने के लिए जा रहे हैं लेकिन मायूस होकर वापस होना पड़ रहा है। अस्पताल में हर रोज 2500 से ज्यादा ओपीडी होती है। इनमें से रोजाना नए 100 से अधिक मरीज विभिन्न वार्डों में दाखिल होते हैं। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम की ओर से वाटर एटीएम यहां पर स्थापित किया गया था। जिसका मकसद लोगों को सस्ती दरों पर पानी मुहैया करवाना था।
पर्ची पर अपील, अस्पताल के एटीएम से भरें पानी
अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों की बनने वाली पर्ची पर बाकायदा लिखा है कि वाटर एटीएम से ही पानी भरें, लेकिन मरीज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सवाल कर रहे हैं कि जब वाटर एटीएम बंद है तो आखिर क्यों इस तरह की सूचना पर्चियों पर लिखी जा रही है।