पेयजल योजना में इटली से मंगवाए 13 वॉल्व लगाने का काम शुरू, चार अक्तूबर से शिमला दौरे पर आ रही है विश्व बैंक की टीम सतलुज पेयजल योजना के संचालन का लेगी जायजा
जुलाई माह से ठप पड़ी है यह पेयजल योजना अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पेयजल संकट से जूझ रहे शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। राजधानी में अक्तूबर में पानी की राशनिंग खत्म हो सकती है।
सतलुज योजना चलाने के लिए इटली से मंगाए गए 13 वॉल्व शिमला पहुंच गए हैं। पेयजल कंपनी ने सतलुज योजना की पाइपलाइन में इन्हें लगाने का काम शुरू कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि अक्तूबर के पहले हफ्ते तक इन्हें लगाने समेत योजना की टेस्टिंग का काम भी पूरा कर दिया जाएगा। शहर को इस योजना से पहले की तरह रोजाना 15 एमएलडी पानी मिलेगा। इससे शहर में चल रही पानी की राशनिंग भी खत्म हो जाएगी। अभी शिमला शहर में तीसरे और चौथे दिन पानी दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार विश्वबैंक की टीम भी चार अक्तूबर से शिमला दौरे पर आ रही है। यह टीम सतलुज पेयजल योजना के काम का जायजा लेगी।
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इसीलिए कंपनी इस दौरे से पहले ही जुलाई से बंद पड़ी इस पेयजल योजना को चलाने के लिए पसीना बहा रही है। पेयजल कंपनी के अनुसार दवाडा से डूम्मी और शकरोड़ी से दवाडा तक की मुख्य पेयजल लाइन में इन वॉल्व को स्थापित किया जा रहा है। कंपनी के एजीएम दिनेश भारद्वाज ने कहा कि सतलुज पेयजल योजना की पाइपलाइन में वॉल्व लगाने का काम शुरू कर दिया है। प्रयास है कि अक्तूबर तक इस योजना को दोबारा संचालित किया जाए जिससे लोगों को राहत मिल सके।
शहर में जल्द रोज मिलेगा पानी
वॉल्व के लगने से कंपनी 22 केवी सब स्टेशन से भी इस योजना का संचालन शुरू कर देगी। कंपनी का दावा है कि ट्रिपिंग होने या लो वोल्टेज के कारण पेयजल लाइन पर पड़ने वाले दबाव को इन वॉल्व से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे लीकेज का खतरा नहीं रहेगा। इससे अगले दो तीन साल योजना को आसानी से संचालित किया जा सकता है। हालांकि वॉल्व लगाने के बाद भी सिर्फ दो ही पंप चलाए जा सकेंगे। कंपनी का कहना है कि शहर को रोजाना 15 एमएलडी पानी इस योजना से दिया जाएगा। बाकी परियोजनाओं से भी 40 एमएलडी तक पानी शहर को मिल रहा है। इस तरह शहर को अगले महीने से फिर 50 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। शहर में रोज पानी दिया जाएगा।
योजना की बढ़ेगी लागत
सतलुज पेयजल योजना की पाइपलाइन में अभी कंपनी को मजबूरी में वॉल्व लगाने पड़ रहे हैं। यदि बिजली बोर्ड पहले ही 66 केवी सब स्टेशन सभी पंपिंग स्टेशनों पर स्थापित कर देता तो कंपनी को लाखों रुपये वॉल्व पर खर्च न करने पड़ते। इटली से मंगाए एक वॉल्व की कीमत तीन से चार लाख रुपये बताई जा रही है। अभी 13 वॉल्व लगाए जा रहे हैं। इस तरह 50 लाख से ज्यादा का खर्च इस पर हो रहा है।