इस पर देवता भगवान विष्णु को जगाने लगे और एकादशी के दिन भगवान को जगाने के लिए पूजा अर्चना शुरू हुई तथा द्वादशी पर भगवान विष्णु नींद से जागे व बैकुंठ चौदस के दिन उन्होंने राक्षस से देवताओं को मुक्ति दिलाई।
बैकुंठ चौदस के बाद ही सभी धार्मिक आयोजन शुरू होते हैं । मंदिर अधिकारी एवं तहसीलदार वचित्र सिंह ठाकुर ने बताया कि पचास हजार अखरोट बारिश के दौरान उपयोग में लाए जाएंगे।
ऐतिहासिक शिव मंदिर में बैकुंठ चौदस पर होने वाली अखरोटों की बारिश का यह त्योहार अपने आप में अनोखा है और देश में इस प्रकार के त्योहार को मनाने का अब तक कोई उल्लेख नहीं है। शुरुआती वर्षों में मंदिर परिसर में नीचे प्रांगण में ही अखरोट वितरित किए जाते थे।
बाद में मंदिर के ऊपरी भाग से यह बारिश शुरू हुई और वर्तमान में इस दिन सैकड़ों लोग मंदिर परिसर में शामिल होते हैं और अखरोटों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कुछ लोग इस दौरान चोटिल भी होते हैं।