कोच की खासियत यह है कि इसमें बैठ कर सैलानी भीतर से ही बाहर के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकते हैं। कोच की छत मोटे कांच की बनाई गई है और खिड़कियों भी सामान्य के मुकाबले बड़ी हैं। कोच के पीछे बड़ा शीशा लगा है।
कोच पूरी तरह वातानुकूलित है। सीटें लकड़ी के साथ कुशन लगाकर तैयार की हैं। कोच के भीतर परंपरागत इंटीरियर स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। वायलेट और सुनहरे रंग से रंगे कोच के अंदर एलईडी लाइटें लगाई गई हैं।
रेल मंत्री पीयूष गोयल विस्ताडोम कोच की सोशल मीडिया पर जमकर प्रमोशन कर रहे थे। बीते सप्ताह गोयल ने दो बार कोच की तस्वीरें अपने ट्वीट की। ट्वीट पर उन्होंने शिमला के पहाड़ों की खूबसूरती की तुलना स्विट्जरलैंड से की थी।
हजारों लोगों ने गोयल के ट्वीट को लाइक, शेयर और कमेंट किया था। पीयूष गोयल ने इसी साल जून में शिमला स्टेशन के निरीक्षण के बाद रेलवे अधिकारियों को स्पेशल कोच तैयार करने के आदेश दिए थे। छह माह के भीतर न सिर्फ विस्ताडोम कोच तैयार किया गया, बल्कि इसका संचालन भी शुरू किया जा रहा है।