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सीएम बोले, राई का पहाड़ मत बनाओ, मैंने नहीं मांगे सचिवों के इस्तीफे

Mon, 26 Sep 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी संगठन के बीच चल रही तनातनी थम नहीं रही। शिमला ग्रामीण से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दो सचिवों के इस्तीफे के बाद सीएम वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू का नाम लिए बगैर फिर पलटवार किया।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि दोनों सचिवों से कांग्रेस कार्यालय बुलाकर इस्तीफे लिए गए हैं। यह गलत है। उन्होंने कभी इस्तीफे लेने को नहीं कहा। वीरभद्र ने कहा कि सीएम भी कैबिनेट मर्जी से नहीं बनाते हैं। इससे पहले बातचीत की जाती है।

प्रदेश कांग्रेस में जो नियुक्तियां की गई हैं, उनमें किसी पद्धति को नहीं अपनाया गया, उनका इशारा उस ओर था। सीएम रविवार को शिमला के रिज मैदान पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मामले को राई का पहाड़ बनाया जा रहा है।
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सीएम बोले मुझे बताए बगैर बनाए सचिव

उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि सचिव इस्तीफे दें। वे राज्य के मुख्यमंत्री हैं। छह दफा सीएम रहे हैं। चार-पांच बार पीसीसी अध्यक्ष रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ी संख्या में सचिव बनाए गए हैं। उन्हें यह मालूम नहीं कि ये कौन बनाए गए। बाद में ही मालूम हुआ।

उनके निर्वाचन क्षेत्र से तीन लोग भी उनके ध्यान में लाए बगैर सचिव बनाए गए। उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि ये बुरे लोग हैं। वे अच्छे लोग हैं। पर जब भी कोई सचिव बनाया जाता है तो जो भी सचिव बनता है, उसके संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी से भी पूछा जाना चाहिए। ऐसी नियुक्तियां करना किसी का सोल राइट नहीं है। किसी पद्धति का होना बहुत जरूरी है।

गुरु गोबिंद सिंह मेरे आदर्श : सीएम
सीएम बोले - हर जगह जाता हूं। मैं सिखों, मुसलमानों, ईसाइयों और तमाम धर्मों के त्योहारों में हिस्सा लेता रहता हूं। मैं सभी धर्मों की बहुत इज्जत करता हूं। सिख धर्म के सब गुरुओं को मैं बहुत सम्मान देता हूं। खासकर गुरु गोबिंद सिंह मेरे आदर्श हैं। उन्होंने जो कुर्बानी दी है और सिख धर्म को जो दिशा दी है, वह बड़ी बात है।

 

सीएम के विस क्षेत्र से सचिवों के इस्तीफे पर सियासी बवाल

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण से ताल्लुक रखने वाले तीन कांग्रेस प्रदेश सचिवों में से दो के इस्तीफों से कई सवाल खड़े हो गए हैं। इस प्रकरण पर रविवार को आए मुख्यमंत्री के बयान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिसमें दोनों सचिवों से जबरन इस्तीफे लेने की बात की गई है। सवाल यहां यह उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र से ही कांग्रेस प्रदेश सचिवों ने इस्तीफे क्यों दिए।

इसकी चर्चा सियासी गलियारों में खूब है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में शिमला ग्रामीण से तीन प्रदेश सचिव तैनात किए गए हैं। प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा के इस्तीफे के बाद एकमात्र सचिव अनिल गोयल हैं, जिन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। गोयल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते हैं। अभी प्रदेश अध्यक्ष ने उनके पास आए इस्तीफों पर किसी तरह का कोई निर्णय नहीं लिया है।

सुन्नी की अधिकांश पंचायतों में प्रदीप वर्मा का अच्छा खासा दबदबा बताया जाता है। दोनों सचिवों के इस्तीफे को कई वजहों से जोड़ कर देखा जा रहा है। सचिवों के इस्तीफे की सूचना शनिवार को ही युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य को मिल गई थी। उन्होंने सचिव प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा से बात कर रविवार को मिलने के लिए बुलाया।

रविवार को विक्रमादित्य ने दोनों नेताओं की मुलाकात मुख्यमंत्री वीरभद्र से करवाई और पूरे मसले पर चर्चा की। ‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा ने साफ कहा कि उन्होंने किसी के दबाव में आकर अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। प्रदीप वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भी इस मुद्दे पर उनका कोई पक्ष नहीं लिया। इससे क्षुब्ध होकर उन्हें इस्तीफा देने का फैसला लिया। 
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विक्रमादित्य ने करवाई प्रदीप और कुसुम की मुख्यमंत्री से मुलाकात

पीसीसी से इस्तीफा देने के बाद प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा से शनिवार रात यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने फोन पर बात की। विक्रमादित्य सिंह ने दोनों नेताओं से इस्तीफे का कारण पूछा। इसके बाद विक्रमादित्य ने प्रदीप और कुसुम वर्मा को रविवार सुबह दस बजे मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए बुलाया।

अंबिका सोनी के सामने भी उठेगा इस्तीफे का मुद्दा
पीसीसी सचिवों के इस्तीफों का मुद्दा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंच सकता है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी अंबिका सोनी 6 अक्तूबर को शिमला आ रही हैं। अंबिका सोनी के सामने भी पीसीसी सचिवों के इस्तीफे का मुद्दा उठाने की तैयारी की जा रही है।

सुक्खू के करीबी हैं तीसरे सचिव
शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से पीसीसी के तीसरे सचिव अनिल गोयल हैं। गोयल पार्टी अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के करीबी है। गोयल का कहना है कि इस विवाद से मेरा कोई लेना देना नहीं है। पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं विद्या स्टोक्स, वीरभद्र सिंह और कौल सिंह ठाकुर के साथ काम कर चुका हूं। अब पीसीसी अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के राजनीतिक सचिव के तौर पर काम कर चुका हूं।

मुख्यमंत्री के विस क्षेत्र का है मामला : चौहान
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नरेश चौहान का कहना है कि यह मामला मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र का है। जिन सचिवों ने पार्टी अध्यक्ष को इस्तीफे दिए हैं वह मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र से संबंध रखते हैं। इसलिए पार्टी अध्यक्ष इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के बाद ही अंतिम फैसला लेंगे।
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