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कांग्रेस प्रत्याशी की जीत की गारंटी न देने पर घिरे वीरभद्र, हाईकमान पहुंचा विवाद

Thu, 14 Dec 2017 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार के दौरान विरोधाभासी बयान देने के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह घिर सकते हैं। चुनाव के दौरान ठियोग में पार्टी प्रत्याशी दीपक राठौर के प्रचार में पहुंचे मुख्यमंत्री का भाषण अब विवादों में आ गया है। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने प्रत्याशी की जीत की गारंटी नहीं लेने की बात कही थी।
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इसे अब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक ने हाईकमान को भेज दिया है। दीपक राठौर हाईकमान के पसंदीदा प्रत्याशी बताए जाते हैं, जबकि मुख्यमंत्री ठियोग से अन्य प्रत्याशी को टिकट देने के पक्ष में थे। शिमला जिले की ठियोग सीट पर कांग्रेस के टिकट आवंटन पर हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ था।

मौजूदा विधायक एवं मंत्री विद्या स्टोक्स के चुनाव नहीं लड़ने के एलान पर पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र ने यहां से चुनाव लड़ने का वादा किया। फिर मुख्यमंत्री के लिए अर्की सीट फाइनल हुई तो ठियोग से प्रत्याशी पर सस्पेंस बन गया। मुख्यमंत्री यहां से विजयपाल खाची को उतारना चाहते थे, लेकिन हाईकमान ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची में दीपक राठौर को टिकट थमा दिया। दीपक के प्रत्याशी घोषित होने से स्टोक्स भी नाराज हो गईं।
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कहा था- मैं जीत की गारंटी नहीं ले सकता

वे खुद भी मैदान में उतर गईं और नामांकन भर दिया। स्टोक्स का नामांकन निरस्त हो गया। इसके बाद सीट को लेकर खेमेबाजी शुरू हो गई। चार नवंबर को वीरभद्र सिंह दीपक के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। इस दौरान एआईसीसी के पर्यवेक्षक भी मौजूद रहे।

भाषण के दौरान समर्थकों ने वीरभद्र से दीपक को आशीर्वाद देने की मांग रखी, लेकिन वीरभद्र लगातार ये बोलते रहे कि प्रत्याशी को मेरा आशीर्वाद तो है, लेकिन मैं जीत की गारंटी नहीं ले सकता। इस मामले को एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने हाईकमान तक पहुंचा दिया है।

एआईसीसी पर्यवेक्षक कमल प्रीत सिंह ने माना कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के भाषण की वीडियो सहित रिपोर्ट हिमाचल प्रभारी सुशील कुमार शिंदे और सहप्रभारी रंजीत रंजन के माध्यम से हाईकमान को भेज दी है।

ये वीडियो पहले ही सोशल मीडिया विभाग के पास पहुंच चुका था और यह फेसबुक और व्हाट्सऐप पर भी वायरल था। पर्यवेक्षक के नाते भाषण की पूरी रिपोर्ट दी गई। इस पर हाईकमान को ही निर्णय लेना है।
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