दरअसल, साल 2010-11 में जमीन खरीद के एक मामले की अनुमति लेने के दौरान कथित भ्रष्टाचार के मामले की विजिलेंस जांच कर रही है। इस मामले में अभी तक दो व्यापारियों पर घूस लेने और उसे आगेे अफसरों को देने का आरोप था। उस दौरान पी मित्रा प्रधान सचिव राजस्व थे। कुछ समय पहले जांच में राज्य चुनाव आयुक्त पी मित्रा पर विजिलेंस ब्यूरो ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
दो बार पूछताछ के लिए बुलाने के बाद सरकार से उनको आरोपी के तौर पर जांच में शामिल करने की अनुमति भी मांगी। साथ ही कोर्ट में आवेदन कर वायस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी गई है। अब दस अक्तूबर को साफ होगा कि मामले में वॉयस सैंपल लेने की अनुमति अदालत से मिलेगी या नहीं। इस पर विजिलेंस की आगामी जांच की दिशा तय हो पाएगी।