विजिलेंस ब्यूरो ने बागवानी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर के खिलाफ अनियमितताओं की जांच बंद कर दी है। स्कैब बीमारी की रोकथाम पर लाए यूरोपीय यूनियन के प्रोजेक्ट में ब्यूरो को कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। अब प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले की क्लोजर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जा रही है।
डॉ. विजय सिंह ठाकुर वर्तमान में बागवानी विश्वविद्यालय नौणी में ही निदेशक विस्तार हैं। विजिलेंस ब्यूरो को मिली शिकायत में उन पर आरोप थे कि यूरोपीय यूनियन के एक प्रोजेक्ट में उन्होंने अनियमितताएं कीं। इस प्रोजेक्ट का पैसा सही बैंक खाते में जमा नहीं किया गया। यह मामला लगभग 15 साल पहले का बताया गया। उस वक्त डॉ. विजय सिंह ठाकुर सहायक आचार्य थे।
विजिलेंस सूत्रों ने बताया कि इस आरोप में कोई साक्ष्य नहीं पाया गया है। इसके अलावा पूर्व कुलपति पर भर्ती अनियमितताओं के भी आरोप लगाए गए थे। विजिलेंस ब्यूरो को इससे संबंधित साक्ष्य भी नहीं मिल पाए हैं। अब इसकी जांच बंद की जा रही है। विजिलेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।
पूर्व कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने यह शिकायत पूरी तरह से राजनीतिक है। क्लोजर रिपोर्ट के बाद वह बदनाम करने वालों पर मानहानि का दावा ठोकेंगे। इस इन्कवायरी को करवाने वाले वही लोग हैं जो विश्वविद्यालय में इन्हीं चीजों में शामिल रहते हैं। उन्होंने वीसी रहते ऐसे कुछ लोगों पर सख्ती की तो उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई।