पैथ लैब में कंपलीट हीमोग्लोबिन, माइक्रोबॉयोलॉजी में कल्चरल, अलाइजा तथा बायोकेमिस्ट्री लैब में शुगर, लिवर, किडनी और हार्ट और पैथोलॉजी लैब में टिश्यू (मांस के टुकड़े) संबंधित टेस्ट होते हैं। बताया गया है कि इन एक टेस्टों की संख्या करीब पांच से छह के करीब होती है।
ऐसे में विभिन्न विभागों में में होने वाले इन टेस्ट की संख्या रोजाना छह से सात हजार के करीब पहुंच जाती है। ऐसे में अगर 24 घंटे इसी तरह के टेस्ट अस्पताल में होते गए तो घाटे का रोना रो रहा महकमा इन टेस्टों की बदौलत आने वाले पैसों से महकमा अन्य कार्य भी कर सकता है।
कॉलेज प्राचार्य के माध्यम से सरकार के समक्ष भी यह मामला उठाएंगे। लैबों में आधुनिक मशीनें हैं। सरकारी लैब में तीन घंटे काम किया जाता है। प्राइवेट लैब को 21 घंटे काम दिया गया है। कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर अशोक शर्मा ने बताया कि लैब संबंधित मामला एमएस के अधीन है। वही इस मामले में पूरी जानकारी दे सकते हैं।
जो टेस्ट एसआरएल लैब में होते हैं, वह सरकारी में भी होते हैं। इसलिए मरीजों को सस्ती दरों पर सभी टेस्ट एक छत के नीचे मिल सके। इसके लिए कर्मचारी महासंघ हर तरह के संभव प्रयास करेगा।- सुखदेव वर्मा, प्रधान, आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ।
अस्पताल में तकनीशियनों की भारी कमी है। पहले भी मामले को उठा चुके हैं। हाल ही में कुछ रिटायर भी हो चुके हैं। जिनसे काम लिया जा रहा है, उन्हें भी अच्छा मानदेय नहीं दिया जा रहा है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण दिक्कत है।- हरिंद्र मेहता, पूर्व महासचिव, आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ।