टीसीपी संशोधन विधेयक प्रदेश सरकार की गले का फांस बन गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मिलने के बाद अब प्रदेश सरकार ने बिल को मंजूरी देने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि राज्यपाल टीसीपी संशोधन विधेयक को पास करें या फिर इसे अस्वीकृत कर सरकार को लौटा दें। यह विधेयक लागू करने के लिए सरकार पर विशेष दबाव है।
टीसीपी विभाग की ढिलाई व मनमानी के कारण ही बिल्डरों और रसूखदारों ने अवैध भवन और बहुमंजिला इमारतें बनवा लीं। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राजभवन ने भी इस बिल पर सख्त रुख अपना लिया है। आम पब्लिक भी चाहती है कि अवैध निर्माण को वैध बनाने वाला ये कानून लागू न हो। इससे लोगों का कानून पर से भरोसा उठेगा। इसलिए राज्यपाल ने खेल विधेयक की तर्ज पर यह बिल भी रोक लिया है।
कहा, हरियाणा सरकार ने भी 127 अनाधिकृत कॉलोनियां की हैं नियमित
सूत्रों के मुताबिक शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि हरियाणा राज्य का भी हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि हरियाणा में 127 कॉलोनियां जो अनाधिकृत थीं, उन्हें नियमित करने को स्वीकृति दी गई है। हिमाचल में बने अवैध भवनों को गिराना असंभव है। प्रदेश सरकार ने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए नियम और कानून तय कर रखे हैं।
एक बार अवैध भवनों को नियमित किए जाने के बाद अगर कोई भवन मालिक फिर अवैध निर्माण करता है तो उसे जेल तक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि टीसीपी संशोधन विधेयक में विलंब होने के कारण प्रदेश में अवैध निर्माण हो रहा है। इस पर काबू पाने के लिए विभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी लाचार हैं। टीसीपी विधेयक की मंजूरी से हिमाचल की जनता को राहत मिलेगी।
30 हजार है अवैध भवनों की संख्या
हिमाचल में 30 हजार के करीब अवैध भवन हैं। इन लोगों ने न तो नक्शा पास कराया है और न ही भवन बनाते वक्त सेटबैक छोड़े हैं। ये लोग समय समय पर सरकार से अवैध भवनों को नियमित करने की मांग करते रहे हैं।
नियमों में बनाए भवन मालिक कर रहे विरोध
हिमाचल में हजारों लोग ऐसे हैं, जिन्होंने नियमों के तहत भवनों का निर्माण किया है। ये लोग टीसीपी विधेयक को मंजूरी देने का विरोध कर रहे हैं।