राजधानी के स्लॉटर हाउस की बड़ी लापरवाही, बिना उपचारित किए एसटीपी में तक पहुंच रहा है अपशिष्ट पदार्थ
मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट की जांच में खुलासा
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी के कृष्णानगर स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस में पशुओं के वध के बाद निकलने वाला खून, तरल पदार्थ और अन्य अपशिष्ट बिना उपचार (ट्रीटमेंट) के छोड़ा जा रहा है। यह न केवल निर्धारित नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
हाल ही में मेट्रोपॉलिटन सर्विलांस यूनिट (एमएसयू) के डॉक्टरों की टीम ने स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि अपशिष्ट के उपचार के लिए परिसर में एक टैंक तो है, लेकिन उसे संचालित करने के लिए कोई प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात नहीं है। केवल रखरखाव के लिए एक कर्मचारी नियुक्त है।नियमानुसार प्रत्येक स्लॉटर हाउस में इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का होना अनिवार्य है। इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मी होने चाहिए जो रसायनों की मदद से अपशिष्ट का उपचार करें और डिस्चार्ज से पहले उसकी सैंपलिंग भी सुनिश्चित करें।
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नगर निगम के स्लॉटर हाउस में स्थापित पुराना ईटीपी निष्क्रिय हो चुका है। इसकी अधिकांश मशीनरी खराब है और अब यह महज एक टैंक बनकर रह गया है। ऐसे में स्लॉटर हाउस का अपशिष्ट सीधे लालपानी स्थित एसटीपी भेजा जा रहा है। हालांकि वहां इसका कितना प्रभावी उपचार हो रहा है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अतिरिक्त रसायनों का इस्तेमाल कर अपशिष्ट को ट्रीट करने का प्रयास किया जा रहा है।
एमएसयू की रिपोर्ट के बाद पेयजल कंपनी ने नगर निगम को पत्र लिखकर बिना उपचार के स्लॉटर हाउस का अपशिष्ट एसटीपी में पहुंचने पर आपत्ति जताई है। कंपनी ने स्लॉटर हाउस में ईटीपी को दुरुस्त करने और प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात करने की मांग की है। चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया तो पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और पेयजल स्रोत भी प्रदूषित होने का खतरा है। कृष्णानगर के अस्थायी स्लॉटर हाउस में प्रतिदिन औसतन 70 भेड़-बकरियों का वध किया जाता है। इनका खून और अन्य तरल अपशिष्ट पहले परिसर में बने टैंक में जाता है, लेकिन वहां से बिना उपचार के सीधे लालपानी एसटीपी पहुंच रहा है। वहीं, नए स्लॉटर हाउस के निर्माण के लिए करीब 43 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जो फिलहाल नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं हैं।
स्वास्थ्य शाखा ने प्रशासन को भेजा प्रस्ताव एमएसयू की रिपोर्ट मिलने के बाद नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रशासन को तत्काल ईटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा है। कृष्णानगर में पहले नगर निगम का आधुनिक स्लॉटर हाउस संचालित होता था, जहां बकरों और मूर्गों का वध किया जाता था। 28 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्लॉटर हाउस में आधुनिक ईटीपी भी स्थापित था, जिसके संचालन की जिम्मेदारी एक विशेषज्ञ कंपनी को सौंपी गई थी। साल 2023 में भूस्खलन के कारण स्लॉटर हाउस क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ईटीपी भी प्रभावित हुआ। इसके बाद संबंधित कंपनी ने ईटीपी का संचालन बंद कर दिया। नगर निगम ने कारोबार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए अस्थायी स्लॉटर हाउस तो शुरू कर दिया लेकिन ईटीपी को दोबारा चालू करने की दिशा में काम नहीं हुआ। वर्ष 2024 से अस्थायी स्लॉटर हाउस में ही पशुओं का वध किया जा रहा है। एमएसयू की रिपोर्ट में यहां तत्काल तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति कर अपशिष्ट का उपचार सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
जल्द लगाया जाएगा ईटीपी
कृष्णानगर स्लॉटर हाउस को भूस्खलन से नुकसान पहुंचा है, इसलिए यह समस्या सामने आई है। जल्द ही यहां नया ईटीपी लगाया जाएगा। फिलहाल स्लॉटर हाउस का अपशिष्ट खुले में नहीं छोड़ा जाता, बल्कि एसटीपी में भेजा जाता है ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। भविष्य में ईटीपी से उपचार के बाद ही इसे एसटीपी में भेजा जाएगा।
बिना उपचार एसटीपी में पहुंच रहा अपशिष्ट
कृष्णानगर स्लॉटर हाउस का अपशिष्ट बिना उपचार के ही लालपानी एसटीपी पहुंच रहा है। हालांकि एसटीपी में उपचार के बाद ही इसे आगे छोड़ा जाता है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त रसायनों का इस्तेमाल करना पड़ता है। नगर निगम से कहा गया है कि स्लॉटर हाउस परिसर में ही ईटीपी संचालित कर अपशिष्ट का वहीं उपचार सुनिश्चित किया जाए।
-आदर्श भोटा, अधिशासी अभियंता, पेयजल कंपनी