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Shimla News: एआई से सौर पैनलों की खराबी का पहले ही चलेगा पता

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एचपीयू में 4.15 करोड़ रुपये की शोध परियोजना के तहत विकसित होगी तकनीक
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बिजली उत्पादन घटने से पहले मिल सकेगा संकेत, सौर उपकरणों की कार्यक्षमता और उम्र बढ़ाने पर रहेगा जोर

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सौर पैनलों में खराबी आने के बाद मरम्मत करने के बजाय पहले ही संभावित समस्या का पता लगाया जा सकेगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से ऐसी तकनीक विकसित करने पर शोध होगा, जो सौर ऊर्जा प्रणालियों के प्रदर्शन में होने वाले बदलावों का विश्लेषण कर संभावित खराबियों की पहचान करने में मदद करेगी। इसके लिए विश्वविद्यालय के हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र को एसजेवीएन से 4.15 करोड़ रुपये की शोध परियोजना मिली है। परियोजना की अवधि 36 महीने निर्धारित की गई है।
शोध का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा प्रणालियों की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और उपयोग की अवधि बढ़ाना है। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पूर्वानुमान तकनीक विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। यह तकनीक सौर उपकरणों के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर सामान्य संचालन और संभावित तकनीकी समस्या के बीच अंतर पहचानने में मदद कर सकती है।
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सौर पैनलों से बिजली उत्पादन कई परिस्थितियों से प्रभावित होता है। तापमान में बदलाव, उपकरणों में तकनीकी खराबी और कार्यक्षमता में गिरावट इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली उपलब्ध आंकड़ों में ऐसे बदलावों और पैटर्न की पहचान कर सकती है, जो किसी संभावित समस्या का संकेत देते हों। इससे उपकरणों की जांच और रखरखाव की योजना समय रहते बनाने में मदद मिल सकती है।
तकनीक की सटीकता और अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता का आकलन शोध के दौरान करना होगा। परियोजना में सौर उपकरणों की उन्नत जांच और उनकी कार्यक्षमता के वैज्ञानिक आकलन पर भी काम होगा। इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि सौर ऊर्जा प्रणालियों के प्रदर्शन में सुधार के उपाय तलाशे जा सकें।
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एसजेवीएन के साथ मिलकर होगा शोध
कुलपति प्रो. महावीर सिंह के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय का हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र इस परियोजना को आगे बढ़ाएगा। समझौता ज्ञापन पर एसजेवीएन के विद्युत डिजाइन महाप्रबंधक प्रकाश चंद और एचपीयू के कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान एसजेवीएन के निदेशक कार्मिक अजय कुमार शर्मा भी मौजूद रहे।
परियोजना से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा मिलने और सौर ऊर्जा प्रणालियों के रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
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