वह आदेश के तहत शुक्रवार को नई पोस्टिंग वाले स्कूल पहुंचे लेकिन ज्वाइन कराने के बजाय उन्हें दो घंटे तक कार्यालय में प्रताड़ित किया गया और फिर तबादला आदेश रद्द करने की सूचना दे दी गई। जोगेंद्र पाल जीर ने कहा कि कुछ साल पहले एक सड़क दुर्घटना में उनकी एक बाजू में गंभीर चोट आई थी।
जिससे अस्पताल में करीब 17 ऑपरेशन हो चुके हैं। उनकी एक बाजू अभी तक काम नहीं करती। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाणपत्र भी दिया है। बताया कि वह डेढ़ साल बाद विभाग से सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
मंडी जिला के दुर्गम क्षेत्र हियूण पेहड़ स्कूल में आने-जाने में कई तरह की दिक्कतें पेश आती हैं। जिसके चलते उन्होंने न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय के आदेश पर प्रधान सचिव शिक्षा से तबादले के आदेश हुए थे।
शुक्रवार को प्रताड़ना के साथ उन्हें ज्वाइनिंग देने से रोकने की उन्होंने शिकायत शिक्षा सचिव और निदेशक को कर दी गई है। उधर, प्रदेश शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में है। शीघ्र ही इस बारे में उचित निर्णय लिया जाएगा।
जिला उपशिक्षा अधिकारी (डिप्टी डीईओ) देशराज बरवाल को हमीरपुर से मंडी जिला के दुर्गम क्षेत्र स्थित रावामापा हियूण पेहड़ स्कूल में तबादला किया गया था। जबकि उनकी जगह प्रधानाचार्य जोगेंद्र पाल जीर को स्थानांतरित किया गया।
बरवाल केंद्रीय मंत्री के साढ़ू हैं। ऐसे में शुक्रवार को जैसे ही जोगेंद्र पाल जीर हमीरपुर में ज्वाइनिंग देने पहुंचे तो उन्हें कार्यालय में इंतजार कराया गया। दो घंटे के बाद ही उनके तबादला आदेश को रद्द कर दिया गया।