मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को हिमाचल साकार करेगा। 10 करोड़ की लागत से बनने वाले पार्क में लगभग 15 से 20 स्टार्टअप कंपनियों को स्थान उपलब्ध होगा और पांच वर्षों की अवधि में प्रत्यक्ष रूप से 300 से 400 आईटी व्यवसायियों को रोजगार
मिलेगा। प्रदेश में डिजिटल अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए हिम स्वान नेटवर्क और राज्य डाटा केंद्र स्थापित किए गए हैं। डाटा सेंटर के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से 32.86 करोड़ धनराशि की आवश्यकता है।
राज्य के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार के लिए प्रयास करने पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कार्यक्रम यूं तो सुबह दस बजे मरीना होटल में था, लेकिन वह दोपहर साढ़े बारह बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली से आने वाली फ्लाइट के निरस्त होने के बाद वह चंडीगढ़ तक सड़क से पहुंचे। इसके बाद मौसम की खराबी की वजह से उन्हें शिमला आने में देर हो गई। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
केंद्रीय मंत्री ने हिमाचल एनआईसी की जमकर तारीफ की। कहा कि हिमाचल पहला राज्य है जिसके सभी जिलों की वेबसाइट स्वास (एसडब्ल्यूएएएस) पर है।
इससे न सिर्फ देशी बल्कि विदेशी लोगों को हिमाचल को जानने और उसके पर्यटन व विशेष महत्व के स्थानों, अधिकारियों के संपर्क आदि की जानकारी लेने में आसानी होगी। उन्होंने 104 प्रतिशत आधार रजिस्ट्रेशन के लिए प्रदेश सरकार की पीठ थपथपाई।
केंद्रीय मंत्री ने मनरेगा के फर्जी मजदूरी की अदायगी का उदाहरण देते हुए कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल लेनदेन होना बेहद जरूरी है। डिजिटल लेनदेन के मामले में हिमाचल पीछे चल रहा है।
भीम ऐप से कैशलेस लेनदेन पर जोर देने की जरूरत है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी कहते थे कि वह दिल्ली से एक रुपये भेजते हैं तो 15 पैसे ही जरूरतमंद तक पहुंचते हैं।
लेकिन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी डिजिटल क्रांति की वजह से मोदी सरकार में अगर हजार रुपये भेजे जाते हैं तो हजार रुपये ही पात्र व्यक्ति को मिलते हैं।