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Himachal: अर्थशास्त्री बोले- राज्यों के लिए अच्छा बजट, कम होगा राजकोषीय घाटा

Wed, 24 Jul 2024 10:43 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

रक्षा क्षेत्र के बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर ग्रामीण विकास एवं कृषि क्षेत्र पर ही बजट का सर्वाधिक अंश खर्च होगा।
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डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. राम लाल शर्मा, डाॅ. कमल सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 एसोसिएट प्रोफेसर अर्थशास्त्र डॉ. राकेश शर्मा के अनुसार केंद्र सरकार के बजट में हिमाचल जैसे ग्रामीण एवं पहाड़ी प्रदेश के लिए बहुत कुछ है। रक्षा क्षेत्र के बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर ग्रामीण विकास एवं कृषि क्षेत्र पर ही बजट का सर्वाधिक अंश खर्च होगा। यह हिमाचल प्रदेश के सरकारी विभागों और लोगों पर ही निर्भर करेगा कि वे बजट के इन प्रयोजनों से कैसे और कितना लाभ उठा पाएंगे। प्राकृतिक खेती के संदर्भ में प्रदेश ने कुछ अच्छी शुरुआत की है, जिसे केंद्रीय बजट से और प्रोत्साहन मिलेगा। 

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विकसित भारत का मुख्य लक्ष्य रख कर कुल नौ प्राथमिकताओं को देश के गांव-शहर, साधन संपन्न राज्य से लेकर कठिन आर्थिक भौगोलिक राज्यों तक उतारा गया है। हिमाचल के संदर्भ में बजट भाषण में यह उल्लेख राहत भरा है कि पिछले वर्ष की आपदा से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापन में विशेष मदद दी जाएगी। औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए कौशल एवं प्रशिक्षण पर भी यह बजट विशेष बल देने वाला है। यहां की औद्योगिक इकाइयों एवं अन्य उद्यमों में मांग के अनुरूप प्रदेश से कितने शिक्षित युवा जा सकते हैं, यह प्रश्न विचारनीय है। कौशल निर्माण और रोजगार बाजार के बारे में अभी भी समझ विकसित नहीं हो पा रही।   

 कौशल-विहीन परंपरागत शिक्षा हासिल करते युवा लगातार छिपी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं क्योंकि कृषि योग्य भूमि बंटकर छोटी हो रही है और पहाड़ों में बढ़ती कृषि लागतें एवं कम उत्पादकता कृषि में एक बड़ी बाधा बनकर उभरी है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास से देश के अनेक शहरों में रोजगार की संभावनाएं और अधिक बढ़ाने के अनेकों प्रयोजन इस बजट में हैं, जिसका लाभ सिर्फ गुणात्मक एवं कौशल विकास करती शिक्षा ही ले सकती है। आईआईटी के सुदृढ़ीकरण से और कौशल केंद्र विकसित करने में बजट से मदद अवश्य मिलेगी। 

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बजट में हर वर्ग को कुछ न कुछ देने का किया प्रयास
सुन्नी काॅलेज के प्राचार्य  डॉ. राम लाल शर्मा के अनुसार केंद्र में सत्तासीन हुई सरकार का बजट उन राज्यों पर केंद्रित है, जहां चुनाव होने है, इसमें एनडीए सरकार के घटक सहयोगियों के राज्यों को अधिक तवज्जो दी गई है। यह बजट एक सामान्य बजट है। हर वर्ग को साधने का प्रयास है। इसमें सबसे अच्छी बात यह है, कि राजकोषीय घाटा कम हुआ है यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हंै। भारत को और अधिक सुरक्षित और बनाने के उदेश्य से रक्षा बजट में अतिरिक्त प्रावधान किए गए है, जिसकी आवश्यकता है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट में कृषि में नई पहलों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, इसमें नई तकनीकों के उपयोग की बात की गई है। ढांचागत सुधार की बात है। बजट ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी उन्मुखी है। इसमें मनरेगा का जिक्र तक नहीं है। युवाओं को कौशल विकास की लिहाज से औद्योगिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप पर अधिक जोर दिया गया है, मगर सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने या बड़े उद्योग स्थापित कर रोजगार उपलब्ध करवाने को लेकर कोई संकेत नहीं है। छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की बात जरूरी है, जिससे बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं होगा। 

   शिक्षा के लिए बजट में कुछ विशेष प्रावधान हो, ऐसा नजर नहीं आता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करने को अतिरिक्त बजट प्रावधान नहीं है। टैक्स स्लैब में जो बढ़ोतरी की है, वह नाकाफी है, ऐसा कर वेतनभोगियों को खुश करने का प्रयास जरूर किया गया है। स्लैब को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार कर कुछ लाभ देकर वेतनभोगी वर्ग को लुभाने का प्रयास है।बजट में जीएसटी के दायरे को बढ़ाने की बात की है, जिससे महंगाई से जूझ रही देश की जनता पर और आर्थिक बोझ बढ़ना तय है। बजट एक सामान्य बजट है। 
 
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करदाताओं को राहत, बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती 
सहायक प्रोफेसर सीयू धर्मशाला डाॅ. कमल सिंह ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण को लक्ष्य करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश किया है। बजट में नौ क्षेत्रों कृषि, रोजगार और कौशल विकास, समावेशी प्राथमिकता और सामाजिक न्याय, विनिर्माण और सेवाएं, शहरी विकास, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, नवाचार और अनुसंधान और अगली पीढ़ी के सुधार को प्राथमिकता दी गई। 

  बजट मध्यम वर्ग और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आया है। एक तरफ जहां नए टैक्स स्लैब में राहत दी गई। वहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है। पेंशनभोगियों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। बजट में सभी वर्ग के निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स को खत्म करने का प्रस्ताव है। विदेशी कंपनियों पर कारपोरेट टैक्स की दर 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत कर दी गई है। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर टीडीएस दर एक प्रतिशत से घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया है। 

 कृषि क्षेत्र के लिए बजट का मुख्य फोकस सहकारी क्षेत्र के विकास के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है। एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में मुद्रा ऋण की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है और साथ ही एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पाद बेचने में सक्षम बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र स्थापित किए जाएंगे। रोजगार एवं कौशल विकास के लिए बजट में पीएम का पैकेज रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन के लिए तीन योजनाएं ले कर आया है।
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