बेरोजगार स्वास्थ्य महिला कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रही हैं। डेढ़ साल का डिप्लोमा करने और नर्सिंग काउंसिल से 6 महीने का प्रशिक्षण लेने के बाद भी ये कार्यकर्ता घर में बैठी हैं।
वेलफेयर एंड चैरिटेबल सोसायटी की राज्य कार्यकारिणी ने स्वास्थ्य विभाग से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सोसायटी की अध्यक्ष नीलम शर्मा ने बताया कि प्रदेश से सैकड़ों बेरोजगार महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने यह प्रशिक्षण लिया है।
एक तरफ आशा वर्करों को प्रदेश की हर पंचायत में बिना प्रशिक्षण और बिना स्वास्थ्य संबंधित कोर्स नियुक्तियां दे दी गई हैं, दूसरी ओर जिन्होंने डिप्लोमा और प्रशिक्षण लिया है उन्हें रोजगार के अवसर नहीं दिए जा रहे हैं।
कहा कि सूबे में पहली बार नर्सों की बैचवाइज भर्ती की जा रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जब नर्सों की भर्ती बैचवाइज हो सकती है तो प्रशिक्षित स्वास्थ्य महिला कार्यकर्ताओं की भर्ती भी इसी आधार पर हो। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
चंबा जिला प्रभारी बबिता, धर्मशाला जिला प्रभारी नीरज, मंडी जिला प्रभारी संतोष, शिमला प्रभारी कमलेश, ऊना से सेवानी, बिलासपुर से सोमा संतोष पूनम मनीषा और अनीता ने बेरोजगार स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग में तैनाती देने की मांग की है।