गर्भपात को लेकर सख्त हिमाचल सरकार ने बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनों में ट्रैकिंग चिप लगाने का फैसला लिया है। मशीनों में चिप लगाने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। कम लिंगानुपात वाले ऊना और कांगड़ा जिले से इसकी शुरुआत की जाएगी। ट्रैकिंग चिप के रिकॉर्ड को बाद में अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों में वेरिफाई किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने बताया कि इसके लिए कंट्रोल रूम तैयार किया जाएगा। यहां हर मशीन की गतिविधि रिकॉर्ड की जाएगी। इसमें मशीन के शुरू होने से लेकर बंद होने की जानकारी शामिल होगी। जिसका अल्ट्रासाउंड होगा, उसका पूरा ब्यौरा भी विभाग के पास उसी मशीन के जरिये पहुंच जाएगा।
इस जानकारी को विभाग संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराएगा। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उस महिला की डिलिवरी होने तक हर अपडेट लेती रहेगी। अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसके कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से पता लगाए जाएंगे।
सूबे में 265 अल्ट्रासाउंड मशीनें
कौल सिंह ने बताया कि प्रदेश भर में 265 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पंजीकृत हैं। इनमें 86 सरकारी और 179 निजी क्षेत्र में हैं। कौल सिंह ने बताया कि पहले चरण में ये चिप कांगड़ा और ऊना में निजी अल्ट्रासाउंड मशीनों में लगाई जाएंगी। इसके बाद सरकारी मशीनों में भी चिप लगाई जाएंगी।
इसलिए पड़ी जरूरत
अल्ट्रासाउंड मशीन संचालक दिन भर विभाग की निगरानी के चलते गड़बड़ी नहीं कर पाते लेकिन कुछ मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें देर रात लिंग जांच की बात सामने आई है। इसी के बाद आधुनिक तकनीक से मानीटरिंग की कवायद शुरू की गई। हालांकि, चिप लगाने का खर्च खुद केंद्र संचालक को उठाना होगा।
यहां कम है लिंगानुपात
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश का बाल लिंग अनुपात 1000 लड़कों पर 909 लड़कियों का है। 845 के बाल लिंग अनुपात के साथ हमीरपुर का गलोर इस सूची में सबसे नीचे है।
जिसके बाद 850 के बाल लिंग अनुपात के साथ मंडी का लडभड़ोल, 875 के साथ कांगड़ा का टियारा, 877 के साथ कांगड़ा का गंगथ और 879 के साथ मंडी का बलद्वाड़ा कम लिंग अनुपात की श्रेणी में शामिल है।