शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र हरिओम पठानिया ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बंगलूरू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत किया। सम्मेलन में भूस्खलन, आपदा प्रबंधन और सतत आधारभूत संरचना से जुड़े विषयों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। हरिओम पठानिया ने शोध में पूर्ववर्ती वर्षा का वर्षा-जनित भूस्खलन पर प्रभाव और जियोसिंथेटिक तकनीकों के माध्यम से ढलानों को स्थिर बनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया है। सम्मेलन से लौटने के बाद हरिओम पठानिया ने विवि के कुलपति प्रो. महावीर सिंह से मुलाकात कर अपने शोध की जानकारी साझा की। कुलपति ने छात्र, शोध मार्गदर्शकों और यूआईटी को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयुक्त वैज्ञानिक अध्ययनों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। यह शोध यूआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. महेश शर्मा और सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस. गणेश कुमार के संयुक्त मार्गदर्शन में किया गया। संवाद