प्रदेश में 9,720 प्राइमरी और 1735 मिडल स्कूल
प्रदेश में 9,720 प्राइमरी और 1735 मिडल स्कूल हैं। प्राइमरी और मिडिल स्तर पर 2,585 स्कूलों में एक या दो कमरे दर्ज हैं। यह स्थिति स्कूलों में उपलब्ध आधारभूत ढांचे और बहु-कक्षीय शिक्षण की जरूरतों के बीच अंतर को उजागर करती है। एक कमरे वाले स्कूलों में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं को एक साथ संचालित करना, अलग-अलग कक्षाओं के लिए समय और शिक्षण सामग्री का प्रबंधन करना तथा विद्यार्थियों को पर्याप्त व्यक्तिगत ध्यान देना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। मिडिल स्तर पर छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों की जरूरतें और विषयों की विविधता इस चुनौती को और बढ़ाती हैं।
प्राथमिक स्कूलों की तस्वीर
प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर कुल 9,720 स्कूल दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक 1,913 स्कूलों में दो-दो कमरे हैं, जबकि 3,733 स्कूलों में तीन-तीन और 3,523 स्कूलों में चार से छह कमरे उपलब्ध दर्ज हैं। सात से दस कमरे वाले प्राथमिक स्कूलों की संख्या 251 है। 11 से 15 कमरे वाले स्कूल केवल 18 हैं, जबकि 15 से अधिक कमरे वाला कोई प्राथमिक स्कूल इस तालिका में दर्ज नहीं है।
मिडिल स्कूलों में भी कमरों की कमी
प्रदेश के 1,735 मिडिल स्कूलों में 181 स्कूलों के पास एक कमरा और 209 के पास दो कमरे हैं। सबसे बड़ी संख्या 1,014 स्कूलों की है, जिनमें तीन कमरे दर्ज हैं। चार से छह कमरे वाले स्कूल 307 हैं, जबकि सात से दस कमरे वाले स्कूलों की संख्या 23 है। केवल एक मिडिल स्कूल में 11 से 15 कमरे दर्ज हैं। मिडिल स्कूलों में छठी से आठवीं तक अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के अनुसार पढ़ाई की व्यवस्था करनी होती है। ऐसे में कमरों की उपलब्धता के साथ-साथ उनकी स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या और शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
हाई और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में भी सामने आई कमी
आंकड़ों में हाई स्कूल स्तर पर कुल 967 स्कूल दर्ज हैं। इनमें पांच स्कूलों के पास केवल एक कमरा और 27 के पास दो कमरे हैं। 138 स्कूलों में तीन कमरे हैं, जबकि 714 स्कूल चार से छह कमरों के सहारे संचालित हो रहे हैं। 68 स्कूलों में सात से दस कमरे, 13 में 11 से 15 कमरे और दो स्कूलों में 15 से अधिक कमरे दर्ज हैं। वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर कुल 1,975 स्कूलों में दो स्कूलों के पास एक कमरा और तीन के पास दो कमरे दर्ज हैं। 20 स्कूलों में तीन कमरे हैं। इस स्तर पर 224 स्कूलों में चार से छह कमरे, 1,034 में सात से दस कमरे, 464 में 11 से 15 कमरे और 228 स्कूलों में 15 से अधिक कमरे उपलब्ध दर्ज हैं।
साधनों की कमी से निपटने को कर रहे काम : कोहली
- सरकारी स्कूलों में साधनों की कमी को दूर करने के प्रयास जारी हैं। कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी नाममात्र है। इनकी समीक्षा की जा रही। कांप्लेक्स सिस्टम बनाकर साथ लगते स्कूल भवनों का भी प्रयोग किया जा रहा है। कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित ना हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।- आशीष कोहली, स्कूल शिक्षा निदेशक