सरकार और संगठन के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निशाने पर आने के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र शिमला ग्रामीण के दो प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) सचिवों प्रदीप वर्मा और कुसुम वर्मा ने शनिवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को अपने इस्तीफे दिए।
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दोनों ने इस्तीफा देने के बाद प्रेस बयान जारी कर खुद को सीएम के बयान से आहत बताया। उन्होंने कहा कि वे आम कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए कार्यरत रहेंगे। उन्हें एआईसीसी और प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी कि लिए निष्ठा देखकर ही सचिव बनाया था।
दोनों ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से सिरमौर में एक जनसभा में पीसीसी सचिवों पर जो टिप्पणी की है, उससे उन्हें बहुत दुख हुआ है। प्रदीप ने कहा कि उन्होंने छात्र जीवन से लगभग 25 साल से कांग्रेस पार्टी की सेवा की है।
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उन्हें एनएसयूआई में आठ से दस बार बतौर कैंपस अध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, आठ से दस साल तक जिला युवा कांग्रेस शिमला ग्रामीण में बतौर महासचिव, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कसुम्पटी में बतौर महासचिव और पिछले पांच-छह साल में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शिमला ग्रामीण से काम करने का मौका मिल चुका है। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी रहे हैं।
चुनाव प्रचार में रहे सीएम के साथ, मगर अब पहचानते भी नहीं
वर्तमान में एआईसीसी की अनुमति से उन्हें पीसीसी सचिव नियुक्त किया गया था। कुसुम वर्मा ने कहा कि वह अपने छात्र जीवन से ही पार्टी से जुड़ी हैं। लगभग 25 से 28 वर्षों से पार्टी की सेवा कर रही हैं।
उन्होंने एनएसयूआई, युवा कांग्रेस सहित महिला कांग्रेस सुन्नी और ब्लॉक महिला कांग्रेस शिमला ग्रामीण में बतौर अध्यक्ष कार्य किया है। पिछले तीन साल से वह हाईकमान से नियुक्ति के बाद पूरी लगन से कार्यरत हैं।
जब 2012 में मुख्यमंत्री ने विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ा था, तो उन्होंने उस समय और बाद में लोकसभा चुनाव के वक्त पूरे दिल, ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ कार्य किया। पूरे चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री के साथ रहने के बावजूद उनका यह बयान कि वे विधानसभा क्षेत्र में बनाए पीसीसी सचिवों को जानते तक नहीं हैं, यह जानकर बहुत दुख हुआ है।
पीसीसी सचिवों कुसुम वर्मा और प्रदीप वर्मा ने इस्तीफे दिए हैं। ये राजीव भवन शिमला भी आए थे। इनके इस्तीफे पर पार्टी विचार कर रही है।- नरेश चौहान, अध्यक्ष, मीडिया विभाग, प्रदेश कांग्रेस कमेटी, शिमला
ददाहू के महिपुर में बोले मुख्यमंत्री - संगठन किसी की जागीर नहीं
वहीं, रेणुका विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दूसरे दिन शनिवार को भी आक्रामक दिखे। उन्होंने कहा कि संगठन किसी की जागीर नहीं है। भविष्य में संगठन में जो भी पद भरे जाएंगे, वो चुनाव से ही भरे जाएंगे। कोई भी व्यक्ति मनोनीत होकर नहीं चुना जाएगा।
सीएम सैनधार के महिपुर में सड़क उद्घाटन के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जनसभा के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में सीएम ने कहा कि भविष्य में कांग्रेस के पदाधिकारी इलेक्टिड होंगे। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि समझने वाले को इशारा ही काफी होता है।
सीएम ने कहा कि राजनीति में चुने हुए नुमाइंदे की ही कद्र होती है। चाहे वह पंचायत प्रतिनिधि ही क्यों न हो। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि जो व्यक्ति चुनकर आते हैं, उनका जलवा व जोश अलग होते हैं। जो चुनकर नहीं आते, उनका केवल बोर्ड होता है।
मुख्यमंत्री का पद मौज-मस्ती का नहीं
मुख्यमंत्री का पद मौज-मस्ती का नहीं
सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले वह पांच वर्ष तक अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद छह बार मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री का पद मौज मस्ती करने का नहीं है। इसके लिए बड़ा बोझ उठाना पड़ता है। मेरे लिए पूरा प्रदेश एक समान है।
हिमाचल ने देश में पेश किया तरक्की का नमूना
भाजपा पर प्रहार करते हुए सीएम ने कहा कि कुछ विरोधी पार्टियों ने प्रदेश को बांटने का प्रयास किया है लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो सके। हिमाचल ने देश में तरक्की का नमूना पेश किया है। आज प्रदेश में 25 हजार किलोमीटर नई सड़कें बनी हैं।
शत प्रतिशत गांवों में बिजली है। 15,500 से अधिक स्कूल खोले हैं। सीएम ने स्पष्ट किया कि नए स्कूलों को खोलने का उद्देश्य केवल शिक्षकों को भर्ती करना ही नहीं बल्कि बच्चों का भविष्य बनाना है। मानकों के अनुसार हर क्षेत्र में शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्कूल खोले जाएंगे।
युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राजनीति में अब बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का दोहरा चरित्र सामने आया है। कहा कि अब जब भाजपा की ही सरकार के समय उड़ी में बड़ा आतंकी हमला हुआ तो अपनी साख बचाने के लिए अनुराग ठाकुर ने भारत-पाक के मध्य किसी भी क्रिकेट मैच के न करवाने का शिगूफा छोड़ दिया है।
भारत-पाक के मध्य धर्मशाला में टी-20 क्रिकेट मैच के रद्द होने के लिए अनुराग ने प्रदेश सरकार पर अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए। यहां तक कि एचपीसीए पदाधिकारियों और उनके पार्टी के नेताओं ने क्रिकेट मैच रद्द होने के लिए हिमाचल सरकार पर प्रदेश की प्रतिष्ठा को गिराने जैसे संगीन आरोप लगाए थे।
विक्रमादित्य सिंह ने शनिवार को कहा कि पठानकोट में कांगड़ा जिले के उनके दो जवान शहीद हुए थे और उनकी चिता शांत भी नहीं हुई थी। बावजूद इसके अनुराग ठाकुर को यहां क्रिकेट और इससे पैदा होने वाला पैसा ही नजर आ रहा था। देश में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते भारत-पाक के मध्य क्रिकेट मैच का युवा कांग्रेस पहले भी विरोध करती थी और आगे भी करती रहेगी।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि धर्मशाला में टी-20 भारत-पाक के मध्य क्रिकेट मैच को लेकर जो राजनीतिक पैंतराबाजी उन्होंने की थी, वह निंदनीय थी। उस दौरान पठानकोट सैन्य शिविर पर भी ऐसा ही आतंकी हमला हुआ था, पर अनुराग को देश और प्रदेश में भारत-पाक के मध्य क्रिकेट मैच की ज्यादा चिंता थी। अनुराग ने उस समय भारत में भारत-पाक क्रिकेट मैच आयोजन कर देश और प्रदेश के शहीदों का जो अपमान किया है। उसके लिए उन्हें देश और शहीदों के परिजनों से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।