कयास लगाए जा रहे हैं कि उसने दरवाजा खोलने का प्रयास किया होगा। कमरे के भीतर मृतक ने उलटी की है। मुंह से झाग भी निकली हुई थी। तसले में कोयले जलाए गए थे। बताया जा रहा है कि कमरे में हवा के लिए कोई स्थान नहीं था।
इस वजह से कोयले की गैस ने दोनों की जान ले ली। डीएसपी बबिता राणा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि दोनों की मौत कोयले की गैस से हुई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
सर्दियों में कोयले की अंगीठी सेंकनी हो तो सावधानी बरतना जरूरी है। चिकित्सक डॉ. वीना सांगल का कहना है कि कोयला जलाने से कार्बन मोनोक्साइड गैस निकलती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति तुरंत निर्णय लेने की क्षमता खो देता है।
गैस के प्रभाव से बेहोश हो जाता है। यहां तक कि उसकी मृत्यु भी हो जाती है। बंद कमरे में कोयला न सेंके। जहां कोयला सेंक रहे हैं, वहां खिड़कियां या वेंटिलेटर खुले रखें।
सोने से पहले अंगीठी को कमरे से बाहर रखना चाहिए। थोड़ी देर के लिए दरवाजे, खिड़कियां खोलने चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पास कोयले की अंगीठी बिल्कुल न जलाएं।