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ठियोग सीट पर फिर घमासान, मंत्री-प्रत्याशी आमने-सामने

Sun, 24 Dec 2017 03:00 PM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं, मगर ठियोग सीट पर कांग्रेस नेताओं में घमासान थमा नहीं है। हाईकमान के सामने निवर्तमान मंत्री विद्या स्टोक्स और राहुल गांधी के करीबी ठियोग से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक राठौर आमने-सामने हो गए हैं।
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अपनी हार पर राठौर की दलील है कि ठियोग में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने चुनाव में उनका सहयोग नहीं दिया। विद्या स्टोक्स के अपने बूथ से ही उन्हें महज छह वोट पड़े, जबकि माकपा को 104 मत मिले।

राठौर ने ये रिपोर्ट कांग्रेस प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के माध्यम से हाईकमान को सौंपी है। दूसरी ओर, शिंदे से स्टोक्स ने शिकायत की है कि दीपक राठौर को अनुशासनहीनता पर पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया जाए।
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स्टोक्स ने कहा है कि जब उनका टिकट फाइनल हो गया था तो राठौर को नामांकन नहीं भरना चाहिए था। स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भंवर जितेंद्र सिंह, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू आदि ने भी उन्हें नामांकन नहीं भरने के निर्देश दे दिए। स्टोक्स के मुताबिक राठौर पार्टी के एक्टिव मेंबर तक नहीं थे।

राठौर ने शिंदे को सौंपी रिपोर्ट में ठियोग कांग्रेस नेताओं की सीटों पर उन्हें मिले मतों का ब्योरा भी दिया है। स्टोक्स के बूथ बारूबाग से कांग्रेस को छह वोट ही मिले हैं। यहां माकपा प्रत्याशी राकेश सिंघा को 104 मत पडे़। पूर्व पार्टी जिला अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के बूथ बारूबाग-दो से भी 27 मत कांग्रेस और 477 वोट माकपा को पड़े।

मार्केटिंग बोर्ड के सलाहकार देवेंद्र श्याम के बूथ बनशेरा से कांग्रेस को 25 मत पडे़, जबकि माकपा उम्मीदवार को 202 वोट पडे़।

ठियोग से कांग्रेस के दो बार प्रत्याशी रहे राजेंद्र वर्मा के झाकड़ी बूथ से पार्टी को महज 14 वोट मिले हैं और माकपा को 134 मत मिले। वीरभद्र के करीबी अतुल शर्मा के बूथ सैंज से भी कांग्रेस को 14 मत पडे़, जबकि माकपा प्रत्याशी को 59 वोट डाले गए।

राठौर ने रिपोर्ट दी है कि ठियोग में कांग्रेेस इसलिए हारी है, क्योंकि उनका ऐसे कई स्थानीय नेताओं ने साथ नहीं दिया। इसके बावजूद ठेठ कांग्रेसियों ने हाथ का साथ नहीं छोड़ा, जिससे उन्हें कम तैयारी के बावजूद 9,101 मत पडे़।

स्टोक्स के अनुशासनहीनता के आरोप पर राठौर ने कहा कि उनके बाद जैसे ही विद्या स्टोक्स ने नामांकन भरा, वे अपने नाम को वापस लेने को तैयार हो गए थे।

उन्होंने इसके लिए आवेदन भी दिया, मगर गलत भरे जाने से स्टोक्स का नामांकन ही रद्द हो गया तो उन्हें पार्टी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया गया। सबकुछ कम वक्त में हुआ। 22 अक्तूबर को टिकट मिला तो 23 अक्तूबर को नामांकन भरने की अंतिम तिथि थी। 

ठियोग की सीट को वीरभद्र के लिए ऑफर किया था स्टोक्स ने 
स्टोक्स ने पहले ठियोग सीट को वीरभद्र सिंह के लिए ऑफर किया था और पहले खुद चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया था, मगर बाद में वीरभद्र ने अर्की से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो टीम राहुल से जुडे़ राठौर ठियोग से टिकट झटकने में कामयाब हो गए।

इसका स्टोक्स ने विरोध किया। स्टोक्स विजयपाल खाची के लिए टिकट मांग रही थी। राठौर को टिकट मिलने के बाद वे खुद चुनाव लड़ने को तैयार हो गईं। दोबारा टिकट लेने के बावजूद उनका नामांकन रद्द हो गया।
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