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जयराम पर धूमल का पलटवार, वीरभद्र सरकार को भी नहीं छोड़ा

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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अपने और बेटे सांसद अनुराग ठाकुर के ऊपर कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश द्वारा लगाए गए आरोपों का करारा जवाब दिया है। हमीरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व सीएम ने जयराम के आरोपों का जवाब दिया।
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धूमल ने कहा कि जयराम रमेश ने न जाने किससे एचपीसीए स्टेडियम को लीज पर दी गई जमीन की असेस्मेंट करवाई है। चूंकि प्रदेश कांग्रेस सरकार के आदेश पर विजिलेंस ने मामला दर्ज किया था और प्रदेश राजस्व विभाग से उस जमीन की असेस्मेंट करवाई गई।

राजस्व विभाग ने अपनी असेस्मेंट में 100 करोड़ नहीं बल्कि इस जमीन की 5.92 करोड़ वैल्यू बताई है। स्टेडियम के लिए लीज एवं पट्टे पर जमीन दी गई है। लीज पर मिली जमीन का मालिकाना हक सरकार का ही रहता है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
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धूमल ने दी जयराम को नसीहत

धूमल ने कहा कि 26 अक्तूबर 2013 को कैबिनेट ने एचपीसीए को अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया और ढाई बजे आधी रात को ही ताले तोड़ कर प्रशासन और पुलिस ने स्टेडियम को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद प्रदेश उच्च न्यायालय ने 5 नवंबर 2013 को इस मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए वापस कब्जा एचपीसीए को देने के आदेश दिए।

18 नवंबर 2013 को फिर से कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में स्टेडियम की जमीन लीज पर और कैबिनेट फैसले पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने पुष्टि कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को आरोप लगाने से पूर्व ज्ञात होना चाहिए कि स्टेडियम का मामला कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट ने स्टे दे रखा है। जिस पर कोई भी गंभीर टिप्पणी कोर्ट के आदेशों की अवमानना होती है।

जयराम के खिलाफ कोर्ट जाएंगे धूमल

उन्होंने कहा कि इस तरह के झूठे आरोप पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने भी लगाए थे, जिसने 11 साल बाद कोर्ट में माफी मांगी थी। धूमल ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता आनंद शर्मा और मोती लाल बोहरा के खिलाफ भी केस किया हुआ है, जिसकी सुनवाई 22 अगस्त को शिमला में है।

उन्होंने कहा कि अपने वकीलों से कानूनी पहलू समझने के बाद अगर केस बनता होगा तो वह जयराम रमेश के खिलाफ भी हमीरपुर कोर्ट में ही केस दर्ज करवाएंगे, ताकि उन्हें भी बार-बार हमीरपुर आकर सफाई देनी पड़े। धूमल ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 2007 में शिमला के कटासनी में एचपीसीए की तर्ज पर खेल स्टेडियम बनने के लिए शिलान्यास किया था, लेकिन इतने वर्षों में एक ईंट तक नहीं लगा पाए।
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फोन टै‌पिंग पर ये बोले धूमल

फोन टैपिंग मामले में चुप रहने पर धूमल ने कहा कि 25 दिसंबर 2012 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और एक दिन पहले 24 दिसंबर को उनके कहने पर स्टेट सीआईडी ने फोन टैपिंग का सारा रिकार्ड अपने कब्जे में ले लिया था।

टेलीग्राफ एक्ट के तहत कोई भी रिकार्ड छह माह के अंदर नष्ट करना होता है। अब अगर ढाई साल के बाद भी फोन टैपिंग का मामला सामने आता है तो सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए कि रिकार्ड नष्ट क्यों नहीं किया गया।
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