सिरमौर के गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलाने का मुद्दा सोलन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने उठाया। गिरिपार की 127 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र घोषित करवाने के लिए संघर्ष में जुटी हाटी समिति ने शाह को ज्ञापन सौंपा है। इसमें पूरे इलाके को एसटी घोषित करने की गुहार लगाई गई है।
ज्ञापन की प्रतियां अमित शाह के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, अनुराग ठाकुर, प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा को भी दी गई हैं। त्रिदेव सम्मेलन में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को हाटी समिति की ओर से सांसद वीरेंद्र कश्यप और मुख्य सलाहकार चंद्रमोहन ठाकुर ने ज्ञापन के साथ, प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट भी सौंपी है।
जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने का मुद्दा करीब पांच दशक से लटका हुआ है। गिरिपार के हाटी समुदाय के लोग इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक समय सिरमौर रियासत का हिस्सा रहा जोनसार बावर जनजातीय क्षेत्र घोषित हो चुका है। प्रदेश सरकार ने 70 के दशक में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने की सिफारिश की थी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में इस क्षेत्र का सर्वे करवाने के निर्देश किए थे। प्रदेश सरकार ने जनजातीय अध्ययन संस्थान से गिरिपार क्षेत्र का सर्वे करवाने का जिम्मा दिया। संस्थान ने वर्ष 2013 में सर्वेक्षण किया और अगस्त 2016 में इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। राज्य सरकार ने केंद्र को इसकी संस्तुति भेज दी है।
समिति के मुख्य सलाहकार चंद्रमोहन ठाकुर ने बताया कि यह मामला प्रभावी ढंग से उठाया गया है। शनिवार को हुई भाजपा के शीर्ष नेताओं की बैठक में भी इस मसले पर मंथन हुआ है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को सोलन में मंच पर ज्ञापन सहित अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी सौंपे गए हैं। इस दौरान पच्छाद के विधायक सुरेश कश्यप, महासचिव विजय भारद्वाज, प्रताप ठाकुर, राजपाल, अरुण, पृथ्वी सिंह, नीरज चौधरी और सोमदत्त भी सोलन गए थे।
कल दिल्ली जाएंगे हाटी समिति के लोग
गिरिपार को जनजातीय घोषित करने के लिए हाटी समिति का एक प्रतिनिधिमंडल 13 दिसंबर को दिल्ली जा रहा है। दिल्ली में यह प्रतिनिधिमंडल सांसद वीरेंद्र कश्यप की अगुवाई में जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करेगा। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से भी मुलाकात का समय मांगा गया है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा चुनाव के दौरान नाहन में चुनावी जनसभा में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने की बात कही थी। भाजपा के घोषणा पत्र में यह मामला रहा है।
क्या सौंपा ज्ञापन में
समिति ने अमित शाह को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि जनजातीय अध्ययन संस्था की रिपोर्ट तथा हिमाचल सरकार की संस्तुति के आधार पर जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को हाटी जनजाति का पंजीकरण रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से करवाया जाए। यह भी
आग्रह किया है कि विकास खंड राजगढ़ की 19 पंचायतों को गिरिपार क्षेत्र से सर्वे रिपोर्ट में बिना किसी ठोस वजह से बाहर करने की बात कही गई है, जबकि विकास खंड की सभी 30 पंचायतों सहित पूरे गिरिपार की 127 पंचायतों के रीति-रिवाज, परंपरा, पिछड़ापन और भौगोलिक परिस्थितियां वर्ष 1968 में जनजातीय घोषित उत्तराखंड के जोनसार बावर के समान हैं।
सिरमौर के लोगों को वापस लौटाई जाए जमीन- सांसद वीरेंद्र कश्यप ने रक्षा मंत्री मनोहर परिकर को सिरमौर जिला की नाहन तहसील के शमशेदपुर और मझौली गांवों में सेना की 72.31.62 हेक्टेयर खाली भूमि को स्थानीय लोगों को वापस करने का मामला उठाया। उन्होंने रक्षा मंत्री से सेना के अधिकारियों को इस बारे में उचित निर्देश दिए जाने की मांग की। जमीन वापस लौटाए जाने से यहां के लोग कृषि, बागवानी अन्य निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।
शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 1979 में सिरमौर जिला की नाहन तहसील के गांव छावनी शमशेदपुर तथा मंझौली गांवों की कुल 185.70.11 हेक्टेयर भूमि भारतीय सेना को स्थानांतरित की थी, जिसमें से मात्रा 113.38.17 हेक्टेयर भूमि सेना के कब्जे में है।
जबकि बाकी 72.31.94 हेक्टेयर भूमि में से 3.18.68 हेक्टेयर भूमि पर स्थानीय नागरिकों के घर, मैदान, रास्ते आदि हैं। ये नागरिक वहां पुश्त दर पुश्त सैकड़ों वर्षों से रह रहे हैं जबकि मझौली गांव से सटी 69.13.26 हेक्टेयर भूमि पिछले 37 वर्षों से खाली पड़ी है जिसका सेना द्वारा किसी तरह भी प्रयोग नहीं किया गया तथा यह पूरी तरह सरप्लस भूमि है।
कश्यप ने शिमला संसदीय क्षेत्र में जतोग, सबाथू, डगशाई तथा कसौली कैंटोनमेंट क्षेत्रों में सिविलियन को पेश आ रहीं दिक्कतों की ओर रक्षा मंत्री मनोहर परिकर का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में ब्रिटिश काल के नियमों की लागू किया जा रहा है।
उन्होंने कैंटोमेंट क्षेत्रों में 1000 वर्ग फीट से छोटे भवनों की स्वीकृति कराने की अनिवार्यता समाप्त करने का अनुरोध करते हुए बिलडिंग वॉय लाज में उचित संशोधन करने की मांग की।