हिमाचल के जिलए सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार से मृतक ट्रैकर का शव शनिवार को नौहराधार लाया गया। इसे राजगढ़ अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। शनिवार सुबह करीब 8 बजे मृतक धर्मेंद्र का शव पहुंचाया गया। पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से कंधे पर उठाकर रात भर पैदल करीब 17 किलोमीटर सफर कर शव नौहराधार पहुंचाया।
रेस्क्यू दल ने 34 किलोमीटर का पैदल सफर किया। वहीं, दूसरे ट्रैकर ठियोग निवासी दीपक वर्मा (25) को पीएचसी नौहराधार से छुट्टी दे दी गई। दीपक को बीती रात नौहराधार लाया गया था। अब उसकी हालत स्थिर है। खबर मिलते ही सभी ट्रैकरों के परिजन शुक्रवार रात को ही नौहराधार पहुंच गए थे। उधर, ट्रैकर टीम में शामिल दार्जिलिंग निवासी ताशी और मंडी निवासी सुरजीत (26) सकुशल वापस लौट गए हैं। नायब तहसीलदार नौहराधार हीरा सिंह ने मृतकों के आश्रितों को 10 हजार की फौरी राहत प्रदान की।
जिद ने ले ली धर्मेंद्र की जान
शिमला के एक होटल में कार्यरत धर्मेंद्र और उनकी टीम के सदस्य चूड़धार जाने की जिद न करते तो जान बच सकती थी। सात युवाओं का दल चूड़ेश्वर महादेव के दर्शन करने जा रहा था। चूड़धार जंगल में फंसे युवाओं को कुछ लोगों ने वापस नौहराधार जाने की सलाह दी थी। खराब मौसम को देख सात युवाओं की टीम से तीन युवा लौट गए।
चार युवकों ने आगे बढ़ने की ठान ली। वे पांच अप्रैल को चूड़धार के लिए रवाना हुए। 6 अप्रैल को फिर मौसम खराब होने से मंदिर तक नहीं पहुंच पाए। चार में से दो युवा सोलन के धर्मेंद्र और दीपक वर्मा चूड़धार चोटी के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में धर्मेंद्र की मौत हो गई। उसका शव चूड़धार मंदिर से करीब 100 मीटर पीछे मिला है।
दूसरा युवक दीपक बर्फ पर फिसलकर घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वे नौहराधार से पीछे जंगल के रास्ते से चूड़धार के लिए रवाना हुए थे। मुख्य रास्ते की बजाय जंगल से जाने के कारण रास्ता भटक गए। दो-तीन दिन तक जंगल में भूखे-प्यासे भटकते रहे। जब वापस शिमला नहीं पहुंचे तो होटल मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले एक युवक की मौत हो चुकी थी।
अब चंबा के आठ छात्र गए चूड़ेश्वर महादेव
प्रशासन और चूड़ेश्वर सेवा समिति की चूड़धार यात्रा पर रोक के बावजूद ट्रैकर जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे हैं। चंबा के 8 छात्र शनिवार को चूड़धार के लिए रवाना हुए। पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की, मगर वे नहीं माने। दिसंबर से लेकर मार्च तक चूड़धार में भारी बर्फबारी होती है।
इस कारण प्रशासन हर वर्ष 30 नवंबर से 13 अप्रैल तक चूड़धार यात्रा पर रोक लगा देता है। मौसम की जानकारी न होने के कारण कई यात्री चूड़धार की यात्रा पर निकल आते हैं। इनमें कुछ मौसम खराब होने पर लौट आते हैं तो कुछ रास्ता भटक जाते हैं। एक सप्ताह पहले देहरादून के आठ छात्र भी चूड़धार यात्रा के दौरान रास्ता भटक गए थे।
उन्हें रात बर्फ के बीच शिवलिंग पर ही काटनी पड़ी। यही वाक्या पिछले वर्ष भी महाराजा अग्रसेन यूनिवर्सिटी बद्दी के छात्रों के साथ हुआ था। ताजा हादसा शिमला के एक होटल के कर्मचारियों के साथ पेश आया है। इनमें कंडाघाट तहसील के सैंज निवासी धमेंद्र (32) की मौत हो गई है। दूसरे व्यक्ति दीपक वर्मा की जान एक भेड़पालक बन बहादुर ने बचाई।
चूडे़श्वर सेवा समिति के अध्यक्ष बलदेव चौहान ने बताया 30 नवंबर से 13 अप्रैल तक यात्रा पर रोक लगी है। बावजूद इसके अधिकतर यात्री नौहराधार रास्ते से चूड़धार आते हैं। समिति ने चेतावनी बोर्ड लगाया है। फिर भी यात्री मान नहीं रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे चार महीने के लिए चूड़धार की यात्रा न करें।