इसकी वजह इसके छिड़काव से मानव, पशु, अन्य जीवों, वनस्पति, जल स्रोतों और पर्यावरण पर होने वाले प्रतिकूल असर का सही असर का सही-सही आकलन का न होना है।
दरअसल किसी भी रसायन का पेड़-पौधों पर तब तक छिड़काव नहीं किया जा सकता है, जब तक इस पर केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने प्रयोग कर ये प्रमाणित न किया हो कि इसका इन सब पर एक मात्रा से ज्यादा प्रतिकूल असर नहीं होगा।
सूत्रों ने बताया कि इस तेल को तैयार करने वाली कुछ कंपनियों ने इस पर प्रयोग और इसके पंजीकरण के लिए केंद्रीय बोर्ड और परिषद के पास आवेदन किया है, मगर वहां से हरी झंडी नहीं मिली है।
हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि ट्री स्प्रे ऑयल का जल्दी पंजीकरण किया जाना चाहिए। जहां तक बागवान मानते हैं कि ये कोई तीखा जहर नहीं है। सेब के पेड़ों को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसका पंजीकरण किया जाना चाहिए।