शिमला। यूको आरसेटी के मशोबरा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में मंगलवार को मशरूम खेती समूह के प्रशिक्षुओं को अपशिष्ट खाद प्रबंधन की जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले अपशिष्ट का प्रभावी उपयोग करना सिखाना था।
प्रशिक्षक कुंदन लाल ने बताया कि मशरूम की खेती से बचे अपशिष्ट को फेंकने के बजाय दोबारा उपयोग में लाकर उपयोगी खाद तैयार की जा सकती है। यह खाद जैविक खेती, सब्जी उत्पादन और गमलों में पौधे लगाने के लिए उपयोगी है। इसके इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में भी मदद मिलती है। यह वर्मी कंपोस्ट के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल की जा सकती है। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने मशरूम उत्पादन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसके बाद प्रशिक्षक ने बटन और ओएस्टर मशरूम की खाद तैयार करने की विधियों की जानकारी दी। संवाद