कोहला (संध बिहाग) की शामलात भूमि से जुड़ा है मामला
मामला जिला हमीरपुर के नादौन क्षेत्र के ग्राम कोहला (संध बिहाग) की शामलात भूमि से जुड़ा है। वादी पक्ष का दावा था कि उन्हें इस भूमि पर पारंपरिक बरतनदारी अधिकार प्राप्त थे और राज्य सरकार ने नियमों के विपरीत यह भूमि देव राज को आवंटित कर दी। वहीं, प्रतिवादियों का कहना था कि यह भूमि वर्ष 1974 के अधिनियम के तहत सरकार में निहित हो चुकी थी और वर्ष 1975 में नियमानुसार एक भूमिहीन व्यक्ति को आवंटित की गई थी। ग्रामीणों के सामुदायिक उपयोग के लिए पर्याप्त भूमि रिजर्व पूल में भी सुरक्षित रखी गई थी। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) नादौन ने वर्ष 2006 में वादियों का दावा खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा
इसके बाद वर्ष 2008 में जिला न्यायाधीश हमीरपुर ने भी उस फैसले को बरकरार रखा। दोनों फैसलों को चुनौती देते हुए वादी पक्ष हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के तहत राज्य सरकार में निहित होने के बाद शामलात भूमि सभी पुराने दावों और पारंपरिक अधिकारों से मुक्त हो जाती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन आपत्तियों या तथ्यों को ट्रायल कोर्ट अथवा प्रथम अपीलीय अदालत के समक्ष नहीं उठाया गया, उन्हें द्वितीय अपील में पहली बार नहीं उठाया जा सकता। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा।