शिमला। गेयटी थियेटर में चल रही हथकरघा प्रदर्शनी में चंबा की पारंपरिक शॉल लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। चंबा की पारंपरिक कला, विशेष तौर पर चंबा शॉल और रूमाल पर देखने को मिलती है। इसमें दोरुखा तकनीक का इस्तेमाल होता है और यह हाथ से बनाई जाती है। इसमें मलमल या खादी के कपड़े पर बिना मुड़े रेशमी धागों (पट) का उपयोग करके रामायण-महाभारत कृष्ण के जीवन के दृश्य उकेरे जाते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसमें की गई कढ़ाई दोनों तरफ एक समान दिखती है। प्रदर्शनी में यह शॉल 6000 से 8000 रुपये तक बिक रहे हैं। विक्रेता बागचंद ने बताया कि चंबा रूमाल का यह काम बहुत ही बारीकी से होता है जिसमें कलात्मकता और धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में लोगों को यह शॉल खूब पसंद आ रही है। इसके बारे में जानने के लिए पर्यटक भी खासी रुचि ले रहे हैं। संवाद