फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल में इन दो देशों की मदद से पर्यटन को लगेंगे पंख

Wed, 27 Jun 2018 07:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल में दो देशों की मदद से पर्यटन को पंख लगाने की तैयारी है। हिमाचल में नार्वे और सीरिया की मदद से पर्यटन और कृषि-बागवानी क्षेत्र में विकास किया जाएगा। बुधवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव विनीत चौधरी की नार्वे और सीरिया मिशन के प्रमुखों के साथ बैठक हुई।

विज्ञापन


इस दौरान दोनों देशों के साथ तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान करने और विकास को लेकर योजना बनाने का फैसला लिया गया। मुख्य सचिव ने बताया कि हिमाचल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।

प्रदेश सरकार राज्य में बुनियादी पर्यटन ढांचे, रज्जू मार्ग, साहसिक पर्यटन, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास और आदर्श पर्यटन गांवों की स्थापना के लिए सहयोग चाहती है। वर्तमान में लगभग दो करोड़ पर्यटक हिमाचल प्रदेश में प्रतिवर्ष आते हैं। 

विज्ञापन

इतने लाख पर्यटक पर्यावरण पर्यटन के लिए करते हैं प्रदेश का भ्रमण

अनुमान है कि लगभग आठ से दस लाख पर्यटक केवल पर्यावरण पर्यटन के लिए प्रदेश भ्रमण पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में 66.56 लाख पर्यटकों की इको टूरिज्म क्षमता है।

मुख्य सचिव ने बताया कि हिमाचल प्रदेश 31 इको सर्किट के विकास और 1000 करोड़ प्रति हब की लागत से पांच इको पर्यटन के विकास के लिए निवेश में सहयोग चाहता है।

इसके अतिरिक्त पारस्परिक लाभों के लिए टूअर ऑपरेटर, संयुक्त आयोजन प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग के लिए सामंजस्य स्थापित करने की भी आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि राज्य की 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जो सीधे तौर पर कृषि और बागवानी से जुड़ी है।

इस विषय पर दोनों देशों के विशेषज्ञों से ली जाएगी तकनीकी जानकारी

राज्य की कृषि पारिस्थितिकी और जैव विविधता वृहद है। यहां प्रदूषण मुक्त पर्यावरण व प्राकृतिक खेती के कारण गुणवत्तापूर्ण गैर मौसमी कृषि उत्पादन के लिए बेहतर परिस्थितियां हैं।

नकदी फसलों के क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ संरक्षित खेती के साथ मूल्य वृद्धि और फसल कटाई के बाद प्रबंधन की भी अपार संभावना है। विनीत चौधरी ने कहा कि प्रदेश में व्यवसायिक कृषि और इसके उत्पादन में वृद्धि तथा कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए इन दोनों देशों के विशेषज्ञों से तकनीकी

जानकारी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को सेब राज्य के रूप में जाना जाता है और अब यह कट फ्लावर राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

 
विज्ञापन

 दोनों राजदूतों ने जुन्गा और चायल का किया भ्रमण

राज्य को एकीकृत फसल कटाई प्रबंधन, रोपण सामग्री, तकनीकी सहयोग और अधिकारियों तथा किसानों की क्षमता वृद्धि में सहयोग की आवश्यकता है।
नार्वे में भारत के राजदूत कृष्ण कुमार ने कहा कि नार्वे ऊर्जा नवीकरणीय, पर्यटन, साहसिक पर्यटन, स्की रिजॉर्ट्स, नागरिक उड्डयन, सुरंग निर्माण और रज्जू मार्ग के क्षेत्र में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि नार्वे के विशेषज्ञों की सहायता से इन क्षेत्रों को विकसित किया जा सकता है।

सीरिया में भारत के राजदूत मनमोहन भनोट ने कहा कि सीरिया की खाद्य प्रसंस्करण, कृषि शोध जैसे मशरूम, आयुर्वेदिक उत्पाद और अर्द्ध कौशल कामगार क्षेत्रों में मजबूत क्षमता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल इन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठा सकता है। दोनों राजदूतों ने जुन्गा और चायल के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और सब्जी उत्पादन, जलापूर्ति योजनाओं और इको टूरिज्म इकाईयों को देखा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें