शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है व्रत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। भय और बाधाओं से मुक्ति देने वाला कालाष्टमी व्रत सोमवार को रखा जाएगा। व्रत की तिथि दोपहर 12:25 बजे से शुरू होकर 14 अक्तूबर को सुबह 11:08 बजे तक रहेगी। इसके चलते व्रत 13 अक्तूबर को रखा जाएगा और चंद्रोदय के बाद खोला जाएगा।
कालाष्टमी व्रत भगवान काल भैरव की पूजा से जुड़ा है। इस व्रत को रखने से भक्तों को भय, शत्रु और बाधाओं से मुक्ति मिलती है, साथ ही सुख-समृद्धि और साहस की प्राप्ति होती है। मिडिल बाजार के शिव मंदिर के पंडित वासुदेव शर्मा ने बताया कि कालाष्टमी का विशेष महत्व भगवान काल भैरव की पूजा से जुड़ा है। यह व्रत भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से सभी प्रकार के भय, रोग और शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की साधना से जीवन में नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और तंत्र-मंत्र का प्रभाव कम होता है।
कालाष्टमी की कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा ने भगवान शिव का अपमान किया। इससे क्रोधित होकर शिव ने अपने उग्र रूप काल भैरव को प्रकट किया। क्रोध में आकर काल भैरव ने ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया। इस कारण उन पर ब्रह्महत्या का पाप लग गया। भगवान शिव ने उन्हें इस पाप से मुक्ति पाने के लिए प्रायश्चित करने को कहा। काल भैरव ने शिव के कहे अनुसार पृथ्वी पर कई वर्षों तक कठोर तप किया। अंततः काशी में उन्हें ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली। तभी से भगवान काल भैरव काशी के कोतवाल के रूप में प्रतिष्ठित हुए और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं।