हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए कभी भी आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों में टिकटों के लिए खींचतान तेज हो गई है। भाजपा के लिए टिकट आवंटन की राह हर गुजरते दिन के साथ मुश्किल होती जा रही है।
प्रचार अभियान को हल्का सा विराम देकर पार्टी अब प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में जुट गई है। पार्टी की इस बार प्रत्याशी चयन प्रक्रिया वर्ष 2012 के मुकाबले बिल्कुल अलग है।
प्रदेश लीडरशिप की जगह केंद्रीय नेतृत्व ही अंतिम सूची तय करेगा। हालांकि, भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के अधीन चयन समिति गठित कर दी है, लेकिन ये समिति निर्णय लेने से अधिक टीम शाह को सुझाव देने की भूमिका में ही रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक कांगड़ा जिले में टिकटों को लेकर सर्वाधिक घमासान मचा है। किसी भी सीट पर आधा दर्जन से कम दावेदार नहीं हैं। त्रिस्तरीय सर्वेक्षण और चयन प्रक्रिया से कई विधायक भी अंतिम सूची से बाहर होने की कगार पर हैं।
एक हफ्ते के भीतर टिकटों पर पूरा होगा होमवर्क
भाजपा आचार संहिता के एक हफ्ते के भीतर टिकटों पर होमवर्क पूरा कर लेगी। केंद्रीय नेतृत्व ने तमाम सर्वेक्षण पूरे कर दिए हैं। प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय की टीमें अपने स्तर पर हर विधानसभा का निरीक्षण कर रही हैं।
हर विधानसभा क्षेत्र में तीन मजबूत प्रत्याशियों की लिस्ट चुनाव प्रबंधन में लगी यह टीम तैयार कर रही है। केंद्रीय नेतृत्व के आदेश पर सत्ती की अध्यक्षता में गठित चयन समिति भी एक दो दिन में अपना काम शुरू कर देगी।
आचार संहिता के तुरंत बाद दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रत्याशी चयन को लेकर बैठक लेंगे। इस बैठक में हर सीट पर सहमति बना ली जाएगी। हालांकि अंतिम निर्णय संसदीय बोर्ड ही लेगा।
भितरघात पर भी रिपोर्ट
चुनाव प्रबंधन के लिए अन्य राज्यों से आए भाजपा और संघ के कार्यकर्ता हर सीट पर भितरघात की स्थिति पर भी रिपोर्ट बना रहे हैं। जिन सीटों पर दावेदारों की संख्या अधिक है, वहां टिकट नहीं मिलने से बागियों के निर्दलीय चुनाव में उतरने का खतरा है। लगभग 15 से 20 सीटों पर बगावत की स्थिति आने की आशंका भी जताई जा रही है।