भारत के इतिहास में पहली बार तिब्बती मूल के लोगों ने हिमाचल विधानसभा के लिए अपने मत का प्रयोग किया। तिब्बती मूल के लोगों ने वीरवार को हिमाचल विस चुनावों में अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देकर खुशी जताई। साथ ही मतदान के माध्यम से उन्हें आवाज मिलने की बात भी कही। मतदान में भाग लेने वाले तिब्ब्ती मूल के लोगों का कहना था कि अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी तिब्बती मूल के लोग चुनावों में भाग लेते हैं।
ऐसे में तिब्बत की स्वायत्तता की लड़ाई में भारत में चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। राज्य में 1400 पंजीकृत तिब्बती मतदाता हैं। लगभग डेढ़ लाख तिब्बती 30 देशों में रहते हैं। लेकिन भारत ने उन्हें मतदान का अधिकार दिया है। तिब्बती मूल की तेंजिन ने कहा कि उन्होंने भागसू मतदान केंद्र पर मतदान किया।
उन्होंने कहा कि वह भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। छेरिंग ने कहा कि वोट स्थानीय मुद्दों के लिए है जो उन्हें अन्य नागरिकों की तरह सामना करना पड़ता है। कहा कि मैं धर्मशाला में पैदा हुआ था, मुझे इस अवसर को प्राप्त करने में खुशी है। ऐसे कई मुद्दे हैं जो हम इस क्षेत्र के अन्य नागरिकों की तरह सामना करते हैं।
हम इस क्षेत्र के विकास के लिए मतदान करेंगे। तिब्बती युवा लोबसांग ने कहा कि वह मैक्लोडगंज में रहते हैं। यहां कई आधारभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मतदान का प्रयोग करने के बाद वह चुने हुए नेता के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।
तिब्बतियों ने पहले 2014 लोकसभा चुनावों में भारतीय लोकतंत्र में पहली बार मतदान किया था। लेकिन उन्होंने अब तक विधानसभा चुनावों में भाग नहीं लिया है। हिमाचल प्रदेश में तिब्बती मूल के करीब तीस हजार लोग रहते हैं उन्हें भारतीय नागरिकता कानूनों के तहत मतदान अधिकार दिए गए हैं।