बिना लाइसेंस और परमिट के दवाई बेचने पर दोषी को सीजेएम चंबा अभय मंडियाल की अदालत ने तीन साल का कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। बिना लाइसेंस और परमिट के दवाइयां बेचने वालों के संदर्भ में स्वास्थ्य महकमें के पास कई शिकायतें पहुंचती रहती है। शिकायतों के आधार पर दवा निरीक्षक समय-समय पर जिले के विभिन्न जगहों पर दबिश देकर बिना लाइसेंस व बिना परमिट के दवाईयां बचने वालों पर शिकंजा कसते हैं।
16 फरवरी 2008 को दवा निरीक्षक अपनी ड्यूटी के दौरान समोट गांव पहुंचे। जहां उन्होंने एक दुकान में दबिश दी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया गया कि दोषी एलोपैथिक दवाएं बेच रहा था। उसने दावा कि वह इसका मालिक है। निरीक्षण के समय वो वहीं मौजूद था और मरीजों को भी देख रहा था। जबकि एलोपैथिक दवाओं की बिक्री के लिए स्टॉक किया गया। ड्रग इंस्पेक्टर ने ड्रग लाइसेंस के लिए कहा।
एलोपैथिक दवाओं की बिक्री के लिए स्टॉक या एक पंजीकृत का वैध प्रमाण पत्र भी मांग भी की, लेकिन उक्त कोई भी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकता। मामला दर्ज हुआ और जांच शुरू हुई। इसके बाद न्यायालय में चालान पेश किया गया। मंगलवार को सीजेएम चंबा अभय मंडियाल की अदालत ने मंगलवार को तीन साल का कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न अदा करने की सूरत में आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले की पैरवी जिला उप न्यायवादी चंबा कंवर उदय सिंह ने की।