प्रदेश के ग्रामीण डाक कर्मियों को ग्रामीण डाक जीवन बीमा पर मिलने वाले इन्सेंटिव की राशि न मिलने से विभाग के उच्च अधिकारियों के प्रति नाराजगी है। साल 2010 के बाद से आज दिन तक इन कर्मियों को पूरा इन्सेंटिव नहीं दिया गया है।
पहले कहा गया कि कोड अलॉट हो गए हैं, उनमें उनका इन्सेंटिव जमा होता रहेगा, लेकिन अब पता चला है कि काफी समय से इन्हें इन्सेंटिव मिला ही नहीं। प्रदेश के ग्रामीण डाक कर्मियों का कम से कम तीन करोड़ रुपये का इन्सेंटिव बकाया है।
डाक विभाग तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के परिमंडलीय सचिव एचएस गुलेरिया ने संघ के द्विवार्षिक सम्मेलन में कहा कि वर्तमान में विभाग की हालत अच्छी नहीं है। विभाग के अधिकारियों को किसी भी प्रकार से काम चाहिए।
कहा कि ग्रामीण डाक कर्मियों को एक ओर रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, दूसरी ओर टारगेट के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। गुलेरिया से सवाल उठाया कि जब कमलेश चंद्र कमेटी की रिपोर्ट लागू हुई तो इन मेहनतकश कर्मियों का बकाया एरिया क्यों काटा गया।
इस वर्ग को तीन साल का उनके बनते भत्तों से क्यों महरूम किया गया। कहा कि प्रदेश के प्रत्येक ग्रामीण डाक कर्मचारी का बनता भत्ता कम से कम एक हजार एक सौ 42 रुपये क्यों डकार गया, विभाग के उच्चाधिकारियों को इसका जवाब देना चाहिए।
अदालत में जाने का मन बना रहे ग्रामीण डाक कर्मी
सम्मेलन में ऊना मंडल के ग्रामीण डाककर्मियों ने कहा कि टारगेट बंद होने चाहिए। अगर विभाग ने टारगेट देकर उन्हें मानसिक प्रताड़ना बंद न की तो जल्द वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जो भी अधिकारी टारगेट देकर उन्हें प्रताड़ित करेगा, उसे कोर्ट में इसका जवाब देना होगा।