हिमाचल में हजारों पशु फार्मासिस्ट अब निजी प्रैक्टिस भी कर सकेंगे। राज्य में सेवानिवृत्त होने या सरकारी नौकरी में नहीं होने की स्थिति में वे निजी प्रैक्टिशनर के रूप में पशुपालकों को अपनी सेवाएं दे सकेंगे। अभी तक पैरा वैट काउंसिल के नियम नहीं बने होने के कारण इस पर रोक थी। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब इसके रूल्स अधिसूचित कर दिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने अपनी पिछली बैठक में हिमाचल प्रदेश सह पशु चिकित्सीय परिषद के अधिनियम 2010 के नियमों को मंजूरी दी है। ये नियम 2010 में बनी हिमाचल प्रदेश पैरा वैट काउंसिल पर लागू होंगे। इस परिषद में अब तक 3500 चिकित्सक दर्ज हो चुके हैं। इनमें लगभग 2200 सरकारी पशु फार्मासिस्ट पंजीकृत हैं।
लगभग 1300 रिटायर हो चुके फार्मासिस्ट भी दर्ज हैं। राज्य में सेवानिवृत्त पशु फार्मासिस्टों की संख्या लगभग 2000 है। इन सभी को नए रूल्स का लाभ होगा। वे पशुओं की दवाओं की दुकान खोल सकेंगे। फार्मासिस्टों की तय सीमा तक उनका इलाज भी कर सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश वेटरनरी फार्मासिस्ट कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष राणा और महासचिव दिनेश नेगी ने कहा कि सरकार के इस निर्णय का वे स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल के लाखों पशुपालकों और हिमाचल प्रदेश सह पशु चिकित्सीय परिषद में पंजीकृत लगभग 3500 पशु चिकित्सा व्यवसायियों को लाभ होगा।
हालांकि, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डा. शेखर मैसी ने कहा है कि अभी इस बारे में सरकारी स्तर पर जानकारी उन तक नहीं पहुंची है। इसे देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।