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हिमाचल के इस जिले में हजारों बच्चे कुपोषण के शिकार, सर्वे में हुआ खुलासा

Fri, 27 Sep 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh पंकज सलारिया, अमर उजाला, चंबा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पिछड़ा जिला घोषित किए जा चुके चंबा में पांच वर्ष से कम आयु के 3,132 मासूम कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें से अति कुपोषित 388 बच्चों की जिला बाल विकास विभाग विशेष निगरानी कर रहा है। विभाग कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है। खुराक में अंडे, दलिया समेत अन्य खाद्य चीजें शामिल हैं। विभाग के पास 2744 बच्चों की सूची है जो मध्यम कुपोषण के शिकार हैं। इस बात की जानकारी हाल ही में मासिक सर्वे में हुई है। चंबा में कुपोषण से निपटने के लिए जिला महिला एवं बाल विकास विभाग मासिक सर्वे करवा रहा है, ताकि हर माह सूची अपडेट हो।

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चंबा के दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वास्थ्य कार्मिकों, आशा सहयोगियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कुपोषित बच्चों की पहचान कर उपचार केंद्र में उनकी जांच और पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चों के लिए विभाग विशेष सहायता दे सके। महिला एवं बाल विकास विभाग चंबा के जिला कार्यक्रम अधिकारी हुकम शर्मा ने बताया कि सर्वे में चंबा में 3,132 बच्चों में कुपोषण का मामला सामने आया है। विभाग अति कुपोषित बच्चों को दोगुना खुराक दे रहा है। 

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क्या है कुपोषण

शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से बीमारियों के शिकार बन जाते हैं।

कुपोषण से मांसपेशियां ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना, कार्य करने पर शीघ्र थकान आना, चिड़चिड़ापन, घबराहट होना, चेहरा नीरस, आंखें के चारों ओर काले घेरे बनना,  शरीर का वजन कम होना तथा कमजोरी, नींद और पाचन क्रिया का गड़बड़ाना तथा खासकर हाथ-पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना कुपोषण के मुख्य कारण है।
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