कोरोना काल में हिमाचल प्रदेश विधानसभा का इस बार का बजट सत्र कई कारणों से यादगार रहेगा। राज्यपाल का रास्ता रोकने से पहले दिन ही हंगामा बरप गया और नेता प्रतिपक्ष तक निलंबित हो गए। आर्थिक तंगहाली में सीएम जयराम ठाकुर ने इस बार भी केंद्र की बैसाखी और आर्थिक तंगहाली का फिर सहारा लिया। जयराम सरकार के कार्यकाल का चौथा बजट सत्र शनिवार को संपन्न हो गया। कोरोना काल में हुआ यह सत्र कई कारणों से याद रहेगा। 26 फरवरी को पहले दिन ही हंगामे के साथ इस सत्र की शुरुआत हुई। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने अभिभाषण पूरा कुछ पंक्तियां ही पढ़ीं तो उसके बाद विपक्ष ने बाहर परिसर में उनका वाहन रोक दिया। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों में धक्का-मुक्की हो गई। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने इसके बाद दोबारा सदन में बैठक बुलाई तो इसमें विपक्ष हाजिर नहीं हुआ। नतीजे में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के पांच विधायक पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिए गए। ये विधायक गेट के बार धरने पर बैठे रहे।
बाद में छह मार्च को मुख्यमंत्री के बजट भाषण से पहले पांच मार्च को इनकी बहाली की गई। इसके बाद विपक्ष पहले की तरह आक्रामक तो नहीं दिखा, मगर सरकार को महंगाई, ऋण, कोरोना काल में स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्यवस्था समेत कई मुद्दों पर घेरता रहा। विपक्ष से घिरते देख अपने मंत्रियों के सामने ढाल बनकर सीएम जयराम ठाकुर भी कई बार खडे़ हुए। सदन की एक बैठक इसलिए रद्द करने का प्रस्ताव भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की सहमति से सदन में पारित हुआ, क्योंकि शिवरात्रि के बाद यह छुट्टियों के बीच में आ रही थी। मंडी के भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा के बजट सत्र के बीच संदिग्ध परिस्थितियों के बीच हुए नई दिल्ली में हुए देहांत के बाद भी एक बैठक को शोकोद्गार के बाद आगे टाल दिया गया है। आखिर में शनिवार को प्रदेश का कुल सालाना 53,484.77 करोड़ रुपए का बजट पारित कर दिया गया। कोरोना काल में सरकार ने अपने सीमित साधनों से टैक्स फ्री बजट पारित किया है, जिसमें अगले साल विधानसभा चुनाव को लक्षित कर हर वर्ग छूने का प्रयास हुआ है।