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Shimla News: नशे में कैद बेटियों की मुक्ति के लिए नहीं कोई केंद्र

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बीते साल 18 महिलाओं को चिट्टे के साथ पकड़ा, जिले में महिलाओं के लिए एक भी पुनर्वास केंद्र नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टे का नशा युवाओं को गिरफ्त में फंसाता जा रहा है। हालत यह है कि युवकों के साथ ही युवतियां भी इस नशे की आदी होती जा रही हैं। इसके बावजूद जिला शिमला समेत प्रदेशभर में युवतियों के लिए कोई पुनर्वास केंद्र सरकारी और निजी क्षेत्र में नहीं है।
सरकारी अनदेखी के कारण अभिभावकों की लाचारी और बढ़ गई है। माता-पिता के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वे अपनी बेटियों को नशे की लत छुड़वाने के लिए कहां लेकर जाएं। संपन्न परिवार तो बेटियों को पड़ोसी राज्यों में हर महीने कई हजार रुपये की फीस देकर पुनर्वास केंद्र में भेज रहे हैं, लेकिन मध्य वर्ग के परिवारों के लिए इतनी अधिक फीस चुकाना मुमकिन नहीं है।
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जिला शिमला पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो पिछले वर्ष 18 युवतियों को पुलिस ने चिट्टे के साथ या इससे संबंधित मामलों में गिरफ्तार किया था। इसमें कई कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं भी हैं। गिरफ्तारी का आंकड़ा बेशक कम हो लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है। सदर पुलिस ने दो दिन पहले ही एक युवती को उस समय चिट्टे के साथ पकड़ा जब वह लालपानी में संदिग्ध अवस्था में मिली। पुलिस को देखकर युवती ने पुड़िया फेंक दी लेकिन जब तलाशी ली गई तो उसमें चिट्टा बरामद हुआ। इससे पहले कोटखाई में पकड़े गए रंजन गिरोह के मामले में भी पुलिस ने तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें दो बहनें शामिल थीं, जो रोहड़ू क्षेत्र की रहने वाली थीं। पुलिस जांच में इनकी नशा तस्करी के मामले में संलिप्तता पाई गई है। इसके अलावा रामपुर, ठियोग और शिमला में दर्ज कई मामलों में युवतियों को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। नशा जिस तरह से प्रदेश में पैर पसार रहा है उससे आशंका है कि आने वाले दिनों में और हालात बिगड़ सकते हैं।
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सरकार को जिलास्तर पर पुरुष और महिलाओं के लिए नशामुक्ति केंद्र खोलने की जरूरत है, जिससे नशे की लत में फंसे युवाओं को उचित उपचार देकर दलदल से बाहर निकाला जा सके। जिला शिमला की बात करें तो यहां पर निजी क्षेत्र में 14 नशामुक्ति केंद्र हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग भर्ती हैं। ये सभी केंद्र पुरुषों के लिए ही हैं। एडीसी शिमला अभिषेक वर्मा ने बताया कि जिला शिमला में निजी क्षेत्र में 14 नशामुक्ति केंद्र हैं। जिले में महिलाओं के लिए कोई भी केंद्र नहीं है। प्रशासन समय-समय पर इन केंद्रों का निरीक्षण करके व्यवस्थाओं का जायजा लेता है।
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