बाल रंगमंच महोत्सव 7 से 9 अक्तूबर तक होगा, पिदू चिड़ू की कहानी का भी होगा मंचन
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अभिनेता एवं रंगकर्मी दिव्या जगदाले करेंगी शिरकत संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बच्चों की कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने के उद्देश्य से कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से चौथे बाल रंगमंच महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह महोत्सव 7 से 9 अक्तूबर तक गेयटी थियेटर के गौथिक हॉल में होगा। बच्चों को कार्यक्रम में पिदू चिड़ू की कहानी भी सुनाई जाएगी।
महोत्सव में शिमला और आसपास के क्षेत्रों की 15 प्रमुख शिक्षण एवं सामाजिक संस्थाओं के बाल कलाकार अपनी नाट्य प्रस्तुतियां देंगे। आयोजकों के अनुसार बाल रंगमंच महोत्सव बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने के साथ उन्हें अपनी बात, कल्पना और सपनों को अभिव्यक्त करने का अवसर देता है। महोत्सव की तैयारियों के तहत प्रतिभागी टीमों की ड्रेस रिहर्सल हो चुकी है। इस बार विभिन्न संस्थाओं की ओर से अलग-अलग विषयों पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। स्वर्ण पब्लिक स्कूल, टूटीकंडी के बच्चे लिटल हैंड्स, बिग डिफरेंस, सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, भट्ठाकुफर की ओर से उपहास, ईसीआई शैले डे स्कूल द्वारा बूढ़ों का गांव और संभोटा तिब्बतन स्कूल, छोटा शिमला के विद्यार्थी पिदू चिड़ू की कथा प्रस्तुत करेंगे।जीएसएसएस कदौर, शोघी की प्रस्तुति मिनी जंगल प्लॉट, डीपीएस शिमला की विश्वास, रूट्स कंट्री स्कूल, बागी की बिशुरी जलेबी पकौड़े, जीएसएसएस सराोग, ठियोग की द सॉइल रिमेम्बर्स और पीएमश्री राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टुटू की यादों का बटन नाटक की प्रस्तुति भी महोत्सव का हिस्सा होंगी।
इसके अलावा सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल, ढली की ओर से मुआवजा, लक्ष्य कॉन्वेंट स्कूल, मंझयाट की द अनसीन कर्स, लक्ष्य पब्लिक स्कूल, अर्की की वरदानी पीपल, मॉडल चिल्ड्रेंस होम, मशोबरा की ए ट्रिप टू शिमला, सर्वोदय बाल आश्रम, रॉकवूड की द कॉफी शॉप और बाल आश्रम, टूटीकंडी की ओर से शक्कर खोरा नाटक का मंचन किया जाएगा। महोत्सव में प्रसिद्ध अभिनेता एवं रंगकर्मी दिव्या जगदाले और डैन धनोआ सम्माननीय अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडली में शामिल डॉ. पूर्णिमा चौहान, अनुराधा दर और आस्था शुक्ला चड्ढा करेंगी। कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष वंदना भागड़ा ने बताया कि इस रंगमंच यात्रा को दिशा देने में वरिष्ठ रंगमंच विशेषज्ञ श्रीनिवास जोशी, जवाहर कौल और रंजन कौशल के साथ सभी क्रिएटिव डायरेक्टर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।