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Shimla News: भट्ठाकुफर फल मंडी के विस्तारीकरण का कार्य अटका

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बीते साल बरसात में पहाड़ी से पत्थर गिरने से एक यार्ड हो चुका है क्षतिग्रस्त, दूसरी की टूटी है छत
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चार माह पहले हुए टेंडर, अब तक कार्य शुरू नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी का टेंडर होने के चार महीने बाद भी विस्तारीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में इस सीजन में भी बागवानों और आढ़तियों को मजबूरन इस खस्ताहाल हो चुकी मंडी में ही कारोबार करना पड़ेगा।

बीते वर्ष बरसात के दौरान इस मंडी में कारोबार करने में आढ़तियों और बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। हल्की सी बारिश होते ही पहाड़ी से पत्थर गिरना शुरू हो जाते हैं और पत्थर ऑक्शन यार्ड के अंदर गिरते थे। इससे कई बार कारोबार भी प्रभावित हुआ था। इस दौरान कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर की ओर से बागवानों को आश्वासन दिया था कि अगले सीजन से पहले इस मंडी का विस्तारीकरण कर दिया जाएगा। इसके लिए अक्तूबर 2025 में छोटे-छोटे कई टेंडर भी कर दिए थे लेकिन फरवरी 2026 तक इसका कार्य शुरू नहीं हो पाया है। भट्ठाकुफर फल मंडी में बोली लगाने के लिए वर्तमान में दो ऑक्शन यार्ड हैं। एक यार्ड कुछ साल पहले पहाड़ी से मलबा गिरने के बाद आधा टूट गया था। इसके बाद अभी तक आधे यार्ड में ही बोलियां लगाई जा रही हैं। दूसरे ऑक्शन यार्ड की छत बीच से टूटी है जिससे मंडी के भीतर पानी आता रहता है और मंडी में रखी सेब की पेटियां खराब हो जाती हैं।
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अस्थायी शेड और नीलामी मंच बनेगा
विस्तारीकरण कार्य में एपीएमसी की ओर से भट्ठाकुफर फल मंडी में अस्थायी शेड और नीलामी मंच बनाया जाएगा। पहाड़ी की ओर डंगा लगाया जाएगा ताकि बरसात के दौरान पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों से बचाव हो सके। इसके अलावा फल मंडी भट्ठाकुफर में शौचालय भी बनेंगे। बागवानी संगठनों का कहना है कि प्रदेश की सबसे पुरानी फल मंडी भट्ठाकुफर में है। वर्तमान में यह खत्म होने की कगार पर है। यदि समय रहते इसका विस्तारीकरण नहीं किया गया तो यह केवल नाम की ही मंडी रह जाएगी।
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कोट
कार्य में बदलाव से विस्तारीकरण में हो रही देरी
भट्ठाकुफर फल मंडी में होने वाले कार्य में कुछ बदलाव किया जा रहा है। इस वजह से विस्तारीकरण के कार्य में देरी हो गई है। इसमें ऊपर वाले ऑक्शन यार्ड को लोडिंग और अनलोडिंग के लिए रखा जाएगा। नीचे वाले ऑक्शन यार्ड में बोलियां लगाई जाएंगी। जल्द मंडी का विस्तारीकरण करके बागवानों और आढ़तियों को सौंप दिया जाएगा।
-देवानंद वर्मा, चेयरमैन, पीएमसी शिमला-किन्नौर
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