संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में पति की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया जिसमें पति को अपनी पीड़िता पत्नी को 6,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पक्षों को 12 अक्तूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिए हैं। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत दायर मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिमला ने 10 नवंबर 2025 को पीड़िता को 6,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण भत्ता देने का अंतरिम आदेश पारित किया था। इस फैसले के खिलाफ सुन्नी निवासी एवं सेना से सेवानिवृत्त प्यारे लाल ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी। अपील में दलील दी गई थी कि ट्रायल कोर्ट ने उसकी आय का आकलन सही नहीं किया है और घरेलू घटना रिपोर्ट में घरेलू हिंसा का कोई ठोस आधार नहीं है।
मामले के अनुसार दोनों का विवाह वर्ष 2001 में हुआ था और उनके दो बच्चे हैं जो अब बालिग होकर पीड़िता के साथ रह रहे हैं। पीड़िता का आरोप था कि पति वर्ष 2024 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुआ और उसके बाद से ही उसने शारीरिक तथा मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी। पीड़िता ने महिला पुलिस थाना बीसीएस न्यू शिमला में शिकायत दर्ज करवाई थी। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित 6 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि पूरी तरह न्यायसंगत है और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।