अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के सितंबर 2025 के निर्णय के संदर्भ में एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर टेट अनिवार्य किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया, तो इससे देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रांत अध्यक्ष विनोद सूद ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की दिनांक 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि कक्षा एक से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगी और इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट रहेगी। महासंघ ने यह भी निवेदन किया कि उस समय प्रचलित वैध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के अंतर्गत नियुक्त होकर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।