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Shimla: तारादेवी तक चलेंगी ट्रेनें, शहर तक में पहुंचने में झेलनी पड़ीं दिक्कतें; चल रहा पुल का मरम्मत कार्य

Fri, 11 Jul 2025 05:42 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

जतोग से समरहिल रेलवे सेक्शन के बीच ब्रिज नंबर 800 पर मरम्मत कार्य के चलते रेलवे ने इस रूट पर पांच दिन के लिए ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी है। 
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तारादेवी तक ही पहुंचीं ट्रेनें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कालका से शुक्रवार को ट्रेनें तारादेवी स्टेशन तक ही चलीं। इसके बाद यात्रियों को शिमला शहर तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ट्रेनों से उतरने के बाद यात्रियों को पुराने बस स्टैंड के लिए एचआरटीसी की सीधी बस सेवा न मिलने के कारण खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कतें पेश आईं। एचआरटीसी ने हालांकि आईएसबीटी (नए बस अड्डे) के लिए बसें चलाईं लेकिन सैैलानियों का कहना था कि सीधी बसें शहर के पुराने बस अड्डे तक चलाएं ताकि उन्हें दिक्कतें न हों। यात्रियों को मजबूरन महंगी दरों पर किराये की टैक्सी लेकर आना पड़ा। राजधानी के जतोग से समरहिल रेलवे सेक्शन के बीच स्थित ब्रिज नंबर 800 का मरम्मत कार्य किया जा रहा है। इस कारण रेलवे ने पांच दिन तक कालका से शिमला आने वाली ट्रेनों का संचालन तारादेवी तक सीमित कर दिया है।

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ट्रेन से आए किसी भी यात्रियों को दिक्कतें पेश न आए इसके लिए एचआरटीसी ने दावा किया था कि दो-दो बसों की सुविधा देंगे लेकिन सीधी बसें न मिलने से यात्री परेशान नजर आए। शाम साढ़े चार बजे जैसे ही ट्रेन तारादेवी रेलवे स्टेशन पर आई यात्री यहां से मुख्य सड़क पर आए। वहां एचआरटीसी की बस खड़ी थी लेकिन यह बस नए बस स्टैंड (आईएसबीटी) के लिए लगी थी। सैलानियों ने कहा कि यह बस सीधी शिमला शहर के लोकल बस अड्डे तक चलनी चाहिए थी। जालंधर, दिल्ली, राजस्थान और अन्य राज्यों से शिमला घूमने आए पर्यटकों को टैक्सियां करके शिमला तक आना पड़ा। इसके लिए सैलानियों को 800 से 900 रुपये किराया चुकाना पड़ा। रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर भी शिमला पहुंचे हैं। वह जतोग समरहिल के बीच चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करेंगे। अधिकारी पांच दिन तक यहां पर रहेंगे।

मांग पर उपलब्ध करवाईं बसें
डिप्टी डिविजनल मैनेजर तारादेवी विनोद शर्मा ने कहा कि यात्रियों की मांग के अनुसार बसों की सुविधा उपलब्ध करवाई है। तारादेवी से चार विशेष बसों की सुविधा यात्रियों को उपलब्ध करवाई थी। शाम तक करीब 118 यात्रियों ने इन बसों में सफर किया है। यह बसें नए बस स्टैंड के लिए उपलब्ध थीं।
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बैम्लोई से वसूला 1200 रुपये किराया
रमेश कुमार ने कहा कि परिवार ने कालका जाना है। समय पर यहां पहुंचे तो किराये पर टैक्सी बुक की। लेकिन बैम्लोई से तारादेवी स्टेशन का किराया 1200 रुपये लगा। इसके बाद ट्रेन का कालका का किराया 600 रुपये (एसी) लगा। ऐसे में ट्रेन से सफर करना महंगा सौदा साबित हुआ।

मोना ने कहा कि टुटू में रहती हूं, गुजरात जाना है। लेकिन तारादेवी तक ही ट्रेनें चलने के कारण उन्हें 800 रुपये में टैक्सी करनी पड़ी। तारादेवी रेलवे स्टेशन के लिए कुछ दिन के लिए पुराना बस अड्डा से सीधी बसेें चलानी चाहिए।

प्रवीण ने कहा कि पहले तो ट्रेन शिमला तक आती थी लेकिन अब पता चला कि ट्रेन तारादेवी तक ही चलेगी। नई जगह है, इसलिए यहां तक लोगों से पूछ-पूछ कर आए हैं। ऐसा पता होता तो कोई और व्यवस्था करतें जिससे ऐसी दिक्कतें न झेलनी पड़तीं।

मुस्कान ने कहा कि परिवार के साथ शिमला घूमने आए हैं लेकिन ट्रेन छूट गई। पता नहीं था कि अब यहां कब तक भटकना होगा। ऐसे में अब दूसरी ट्रेन पकड़ कर जालंधर जा रही हूं। मौसम भी खराब है तो ऐसे में रास्ता ढूंढना भी थोड़ा मुश्किल लगा।
 
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