ऐतिहासिक शिव मंदिर अपनी अनेक पौराणिक कथाओं और वर्ष भर होने वाली गतिविधियों से पूरे देश में विख्यात है। रावण की तपोस्थली के रूप में विख्यात मंदिर में जहां दशहरा नहीं मनाया जाता है, वहीं पंच भीष्म के दौरान बैकुंठ चौदस को यहां अखरोटों की बारिश की जाती है।
अखरोटों की इस बारिश के दौरान पुजारी मंदिर में होने वाली रोजाना आरती के बाद मंदिर के ऊपर से चारों तरफ अखरोटों की बारिश करते हैं और नीचे मौजूद सैकड़ों शिव भक्त इन अखरोटों को प्रसाद के रूप में एकत्रित करते हैं।
बारिश के दौरान कुछ लोग इन अखरोटों से मामूली रूप से जख्मी भी होते हैं। अपने प्रकार की यह अनोखी बारिश वर्षों से होती आई है और किसी भी व्यक्ति को इस बारिश के शुरू होने के सही समय का ज्ञान नहीं है।
मंदिर पुजारी सुरिंद्र आचार्य, बंटू शर्मा और संजय शर्मा के मुताबिक देवशायनी एकादशी से लेकर देव उत्थान (पंचभीष्म) तक के चार माह में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य पर रोक होती है।