शिमला। शहर के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के छठे दिन सोमवार को सती चरित्र और दक्ष यज्ञ विध्वंस की कथा सुनाई गई। कथावाचक पंडित मुरली मनोहर शास्त्री ने बताया कि सती का चरित्र दो मुख्य विषयों से जुड़ा है एक पौराणिक देवी सती और दूसरा एक प्राचीन प्रथा सती से। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के क्रोध से वीरभद्र द्वारा प्रजापति दक्ष के यज्ञ का विनाश किया था। यह तब हुआ जब दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया और शिव के अलावा सभी देवताओं को आमंत्रित किया। बेटी सती ने अपने पति शिव के अपमान को सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि में आत्मदाह कर लिया। शिव के क्रोध से उत्पन्न वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया और यज्ञ को नष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि सती ने पुनर्जन्म लेने का संकल्प किया था और अगले जन्म में वह राजा हिमालय और रानी मैनावती के घर पार्वती के रूप में जन्मीं जिसके कारण उन्हें हिमालय की पुत्री और शैलजा भी कहा जाता है। मंदिर में गुप्ता परिवार की ओर से आयोजित होने वाली कथा 8 नवंबर तक चलेगी। संवाद