शिमला। गंज बाजार स्थित सनातन धर्म सभा की ओर से राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित राम कथा में पंडित उमाकांत शास्त्री ने राजा दशरथ की मृत्यु का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कथा में बताया कि राजा दशरथ ने कैकेयी के दबाव में आकर श्रीराम को माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष के वनवास को जाने का आदेश दिया। इसके बाद राजा दशरथ पुत्र वियोग के कारण बीमार हो गए और कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि श्रीराम के वनवास प्रस्थान के बाद भरत राज पाठ संभाल रहे थे। उन्हें राजा दशरथ का अंतिम संस्कार करने को कहा गया लेकिन भरत ने अपने बड़े भाई का मान रखा और जब तक श्रीराम वनवास से नहीं लौटे तब तक उनका उन्होंने अंतिम संस्कार नहीं किया। कथा वाचक ने बताया कि इस कथा से हमें छोटे भाई का बड़े भाई के प्रति सम्मान और गरिमा बनाए रखने की शिक्षा मिलती है। आज भाई एक दूसरे अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें श्रीराम और भरत प्रेम से शिक्षा लेनी चाहिए। सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि कार्यक्रम में सभा के प्रधान अजय सूद और महासचिव धर्मपाल पुरी भी मौजूद रहे। संवाद