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ऊर्जा नीति के सरलीकरण में फंसा पेच, ये है वजह

Sat, 21 Apr 2018 10:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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प्रदेश में जलविद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए पुरानी ऊर्जा नीति के सरलीकरण में पेच फंस गया है। असल दिक्कत लटकी परियोजनाओं को नए सिरे से आवंटित करने को लेकर आ रही है। 

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ऊर्जा विभाग की जंगी थोपन सहित कई लटकी परियोजनाओं को नए सिरे से आवंटित करने के लिए राहत देना चाहती है, लेकिन उसमें कई वित्तीय और कानूनी अड़चनें आड़े आ रही हैं।

इसी के चलते 16 अप्रैल की कैबिनेट से ठीक पहले प्रस्ताव को एजेंडे से बाहर किया गया। वित्त और विधि विभाग से परामर्श लेने के बाद ही मामला कैबिनेट में आएगा।

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रियायतें देने का मसौदा किया फाइनल

प्रदेश में लटके आधा दर्जन हाइड्रो पावर प्रोजेक्टों को नए सिरे से शुरू करने के लिए ऊर्जा नीति का सरलीकरण किया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की रियायतें देने का मसौदा विभाग ने फाइनल भी कर लिया।

प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 12 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के रायल्टी प्रावधान को भी लचीला बनाया जा रहा है। विभाग की ओर से भेजे फाइनल प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने से ठीक पहले रोक दिया गया।

सरकार से विचार विमर्श के बाद मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने बदलावों से होने वाले वित्तीय और कानूनी पहलुओं को लेकर विभाग को स्पष्ट करने को कहा है। 
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उर्जा नीति सरलीकरण में ये रहा असली पेच

बताया जा रहा है कि असल पेच 960 मेगावाट की जंगी थोपन परियोजना सहित लटके हुए दूसरे प्रोजेक्ट हैं। इन सभी की एक हजार करोड़ की अपफ्रंट मनी सरकार के पास है, जिन्हें वापस नहीं किया जा सकता।

परियोजनाओं को नए सिरे से आवंटित करने में कई कानूनी अड़चनें हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के मुताबिक हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने के लिए बनाए जा रहे नए प्रावधानों में अभी कई तरह की दिक्कतें हैं।

कानूनी और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। जिन प्रोजेक्टों के आवंटन के बावजूद कंपनियों ने काम शुरू नहीं किया, उनके दोबारा आवंटन करने की व्यवस्था बनाई जाएगी। इस मसले पर विधि विभाग से राय ली जाएगी। 
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